पीतल नगरी से संविधान वाटिका तक, विरासत और आधुनिकता का नया केंद्र बन रहा उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद शहर
मुरादाबाद, जिसे 'पीतल नगरी' के नाम से जाना जाता है, अब आधुनिक विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण ...और पढ़ें

पीतल नगरी से आधुनिक विकास और विरासत संरक्षण का नया केंद्र
HighLights
पीतल उद्योग 10,000 करोड़ का कारोबार, ओडीओपी से सशक्त।
15 करोड़ का संविधान साहित्य पार्क, लोकतंत्र का जीवंत प्रतीक।
रिंग रोड, विश्वविद्यालय, अस्पताल से शहर का तीव्र विकास।
डिजिटल डेस्क, मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद शहर, जिसे दुनिया 'पीतल नगरी' (Brass City) के नाम से जानती है, आज केवल अपने हुनर और कारोबार के लिए ही नहीं, बल्कि आधुनिक विकास, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए भी पहचान बना रहा है। कभी अपनी धूल भरी गलियों और सीमित बुनियादी ढांचे के लिए जाना जाने वाला यह शहर अब रिंग रोड, नई यूनिवर्सिटीज और पर्यटन स्थलों के साथ एक विकसित और आधुनिक रूप ले रहा है। मुरादाबाद अब केवल एक शहर नहीं, बल्कि 'बढ़ते उत्तर प्रदेश' की कहानी का एक अहम हिस्सा है।
पीतल का कारोबार: 10,000 करोड़ का उद्योग और ओडीओपी की ताकत
मुरादाबाद की पहचान उसकी मिट्टी और यहाँ के कारीगरों के हाथों में बसे हुनर से है। यहाँ का पीतल उद्योग सिर्फ एक व्यापार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक परंपरा है।
'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत पीतल उद्योग को नई ऊर्जा मिली है।
आज यह शहर अमेरिका से लेकर मिडिल ईस्ट तक अपने पीतल के उत्पादों (जैसे फूलदान, मूर्तियां और सजावटी सामान) का निर्यात कर रहा है।
इस उद्योग से न केवल हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है, बल्कि यह जिले की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार (लगभग 10,000 करोड़ का कारोबार) भी है।
संविधान साहित्य पार्क: लोकतंत्र की आत्मा का प्रतीक
मुरादाबाद अब सिर्फ उद्योगों का शहर नहीं रहा, बल्कि यह विचारों और लोकतंत्र का भी केंद्र बन रहा है।
शहर में 15 करोड़ रुपये की लागत से 2 एकड़ में 'संविधान साहित्य पार्क' (Constitution Literature Park) विकसित किया गया है।
इस पार्क में म्यूरल्स (Murals), इंस्टॉलेशंस (Installations) और क्यूआर कोड (QR Codes) के माध्यम से भारत के संविधान निर्माताओं और महान साहित्यकारों (जैसे दुष्यंत कुमार और जिगर मुरादाबादी) के योगदान को दर्शाया गया है।
स्मार्ट सिटी मिशन (Smart City Mission) के तहत बना यह पार्क युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए लोकतंत्र और साहित्य को करीब से समझने का एक जीवंत माध्यम है।
विकास की नई उड़ान: रिंग रोड और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय
मुरादाबाद के विकास की गति को तेज करने के लिए कई बड़ी परियोजनाएं जमीन पर उतर रही हैं:
कनेक्टिविटी: शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए 33 किलोमीटर लंबे रिंग रोड (Ring Road) का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा, नए बाईपास (Bypass) भी शहर के ट्रैफिक को सुगम बना रहे हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य: निर्माणाधीन 'गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय' (Guru Jambheshwar University) शिक्षा के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित होगा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में 100 बिस्तरों वाला आधुनिक क्रिटिकल केयर अस्पताल (Critical Care Hospital) तैयार किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
जिगर मुरादाबादी और मुरादाबादी दाल: कला और स्वाद का संगम
मुरादाबाद की पहचान केवल पीतल से नहीं है।
यह शहर उर्दू के मशहूर शायर जिगर मुरादाबादी की जन्मस्थली है, जिनकी शायरी आज भी महफिलों में जिंदा है।
खान-पान के शौकीनों के लिए 'मुरादाबादी दाल' एक विशेष आकर्षण है, जो पूरे उत्तर प्रदेश में अपने अनोखे स्वाद के लिए जानी जाती है।
मुरादाबाद आज इतिहास और भविष्य के एक शानदार संगम के रूप में उभर रहा है। पीतल की चमक को सहेजते हुए, यह शहर अब आधुनिक सड़कों, शिक्षा केंद्रों और संविधान पार्क जैसी पहलों के साथ 'बढ़ता यूपी, दौड़ता भारत' की थीम को पूरी तरह से चरितार्थ कर रहा है।
