मुरादाबाद (प्रदीप चौरसिया)। आर्थिक तंगी से बीएसएनएल गुजर रहा है। हालत यह हैं कि एक्सचेंज व मोबाइल टावर के जेनरेटर में डीजल डालने के लिए फंड तक नहीं हैै। बिजली जाते ही ग्रामीण क्षेत्रों के 15 टेलीफोन एक्सचेंज व दो सौ मोबाइल टावर बंद हो जाते हैं। मोबाइल, ब्राडबैैंड, लैैंडलाइन उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।  

बीएसएनएल की आर्थिक स्थिति खराब 

पिछले साल अक्टूबर से बीएसएनएल की आर्थिक स्थिति खराब होनी शुरू हो गई है। हालात यहां तक पहुंच गए थे कि अधिकारियों व कर्मियों को वेतन तक नहीं मिल रहा था। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मुरादाबाद, अमरोहा व सम्भल जिले में बीएसएनएल की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी गई थी। सूचना अधिकारी व उप महाप्रबंधक (सीएफएल) ने कुछ सवाल पर जवाब तक नहीं दिया। अपीलीय अधिकारी से अपील की गई उसके बाद सूचनाएं मिल सकीं। क्षेत्र में 410 मोबाइल टावर हैं, जिसमें टू-जी के 321 व थ्री-जी के 179 मोबाइल टावर हैैं। सभी को चलाने के लिए बिजली के कनेक्शन हैं, बिजली नहीं होने पर बिजली की आपूर्ति करने के लिए जेनरेटर की व्यवस्था है।

जेनरेटर के लिए मिलते हैं इतने रुपये 

बजट के मामले में स्पष्ट जवाब देने में बचने का प्रयास किया गया। प्रत्येक माह जेनरेटर चलाने के लिए दो करोड़ रुपये के स्थान पर 15 लाख रुपये का आवंटन किया जाता है। बिजली जाने पर और डीजल नहीं होने पर कितने टावर बंद होते हैं, इसका सीधा जवाब नहीं दिया गया। जवाब में कहा कि बिजली रहने पर ही टेलीफोन एक्सचेंज चलती है। जवाब का मतलब है कि बिजली जाते ही ग्रामीण क्षेत्रों में 15 टेलीफोन व दो सौ मोबाइल टावर बंद हो जाते हैं। ग्रामीण व कस्बा क्षेत्र के टेलीफोन एक्सचेंज बंद होने से ब्राड बैैंड व टेलीफोन काम करना बंद हो जाते हैं। बिजली जाने पर चार लाख से अधिक मोबाइल उपभोक्ता परेशान हो जाते हैैं। शहरी क्षेत्रों में डीजल की व्यवस्था होने से मोबाइल सेवा चालू रहती है।

 

Posted By: Narendra Kumar

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