मुरादाबाद: दैनिक जागरण परिवार साहित्य के लिए काम करने वालों का सम्मान कर रहा है। यश भारती से सम्मानित वरिष्ठ नवगीतकार माहेश्वर तिवारी के सम्मान के बाद अब प्रसिद्ध शायर मंसूर उस्मानी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा होगी। साहित्यिक कायरें के लिए 11 सितंबर यानी मंगलवार की दोपहर 12 बजे रामगंगा विहार स्थित एमआइटी सभागार में बुद्धिजीवी और साहित्य प्रेमियों के बीच उन्हें सम्मानित किया जाएगा। इस कार्यक्त्रम में साहित्य प्रेमियों और आम जनता का प्रवेश निश्शुल्क है। कार्यक्रम में शायर मंसूर उस्मानी अपने सर्वश्रेष्ठ पाच कलामों को सुनाएंगे। परिचय

नाम: मंसूर उस्मानी

पिता: मरहूम गौहर उस्मानी प्रसिद्ध शायर

जन्म: एक मार्च 1954

जन्मस्थल: मुहल्ला नई बस्ती मुरादाबाद

शिक्षा: एमए उर्दू

साहित्यिक सफर: 1970 से शुरू

कार्यस्थल: मुरादाबाद नगर निगम से सेवानिवृत्त

साहित्य:प्रसिद्ध शायर मोहतरम गौहर उस्मानी से विरासत में मिली शायरी और शौक, सलाहियत ने दिलाई दुनिया में पहचान

देश-विदेश के मुशायरों में इन्होंने संचालन की जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। इनमें कराची पाकिस्तान, हैदराबाद, कृष्णा नगर नेपाल, दुबई, बहरीन, दोहा कतर, जेद्दा, रियाद, टोरंटो, न्यूयॉर्क, लॉस एंजिलिस, बॉस्टन, सैन फ्रासिस्को, ह्यूस्टन, बाल्टिमोर, डलास, शारजाह आदि शामिल हैं। ये मिले सम्मान

मंसूर उस्मानी को उनके साहित्य लेखन के लिए उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी सम्मान, हिंदी उर्दू साहित्य सम्मान, भारतीय दूतावास सऊदी अरब द्वारा प्रशस्ति पत्र, संस्कार भारती सम्मान, रोटरी इंटरनेशनल अवार्ड, अखिल भारतीय साहित्यकार परिषद सम्मान जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त लखनऊ से प्रकाशित होने वाली उर्दू की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका लारेब ने मंसूर उस्मानी पर अपना एक विशेष संकलन भी प्रकाशित किया। मुरादाबाद के रोटरी इंटरनेशनल सेंट्रल ने उनके समग्र साहित्यिक योगदान के लिए मानद सदस्यता से भी सुशोभित किया है। जिगर मुरादाबादी से मुहब्बत में बनाई फाउंडेशन

जिगर मुरादाबादी से प्रेम एवं उनके प्रति श्रद्धा के कारण मंसूर उस्मानी ने जिगर मुरादाबादी फाउंडेशन बनाई। जिसमें वर्ष 1995 से लगातार कला एवं साहित्य को समर्पित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पाच काव्य संकलन प्रकाशित

मंसूर उस्मानी ने आम हिंदुस्तानी की जबान में अपना काव्य सृजित किया है। जिसकी वजह से उनका उर्दू साहित्य हिंदी जानने वाले पाठकों तक आसानी से पहुंचा है। उनके पाच काव्य संकलन प्रकाशित हो चुके हैं। जिसमें मैंने कहा, गजल की खुशबू और अमानत हिंदी में प्रकाशित हैं। जुस्तुजु और कशमकश उर्दू में प्रकाशित हुए हैं।

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