मुरादाबाद में तेंदुए का आतंक जारी, दो बछड़ों का किया शिकार; ग्रामीणों में दहशत
तेंदुए ने मुरादाबाद के बैजनाथपुर और बहापुर बलिया गांवों में दो बछड़ों का शिकार किया, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई।

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
मुरादाबाद में तेंदुए ने दो बछड़ों का शिकार किया, दहशत।
ठाकुरद्वारा में तेंदुए को आदमखोर घोषित करने की रिपोर्ट भेजी।
अमरोहा के कई गांवों में भी तेंदुए की लगातार सक्रियता।
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। तेंदुए ने रविवार को वंदे वाली मढ़ैयों और बहापुर बलिया गांव के अलग-अलग जंगलों में दो बछड़ों का शिकार किया। बछड़ों के अवशेष मिलने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने घटनास्थल के आसपास खून के निशान और बछड़ों के शरीर का काफी हिस्सा गायब देखा।
वन विभाग की टीमों ने मौके पर जांच की और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी। उधर, बैजनाथपुर गांव में निहाल सिंह के खेत के पास तेंदुआ दिखाई देने से क्षेत्रवासियों में खौफ है।
वंदे वाली मढ़ैयों गांव में भोजराज सिंह पाल के खेत में रविवार को ग्रामीणों को बछड़े के अवशेष मिले। घटनास्थल की स्थिति देखकर ग्रामीणों ने तेंदुए द्वारा शिकार किए जाने की आशंका जताई। गांव में तैनात वन विभाग के दो कर्मचारियों ने आसपास के क्षेत्र में भी जानकारी जुटाई और ग्रामीणों से अकेले खेतों या जंगल की ओर नहीं जाने की अपील की। बहापुर बलिया गांव से कुछ दूरी पर जंगल में भी शनिवार रात एक छुट्टा बछड़े पर तेंदुए ने हमला कर उसे अपना निवाला बना लिया।
विजेंद्र सिंह और रामफल सिंह ने बताया कि बछड़े के शरीर का काफी हिस्सा गायब था। यहां भी वन विभाग की टीम ने जांच कर लोगों को जागरूक किया। पूर्व प्रधान अनिल बिश्नोई, प्रधान पति कुलदीप सिंह, गिरीश पाल, छत्रपाल सिंह, डालचंद सिंह और बालकरण सिंह ने बताया कि अब लोग अकेले खेतों और जंगल की ओर जाने से बच रहे हैं।
ठाकुरद्वारा के जंगल में तेंदुए के बीच बाघ का शोर, दहशत
मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में तेंदुए के हमलों बीच बलिया और आसपास के गांवों में बाघ के शोर ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। सूचना तेजी से फैलने के बाद वन विभाग भी सतर्क हो गया है। बिजनौर वन विभाग से भी सहयोग लिया जा रहा है हालांकि, क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वन विभाग की टीमें सूचना के आधार पर जंगल और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी कर रही हैं। पगमार्क, कैमरा ट्रैप और अन्य साक्ष्यों के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्षेत्र में वास्तव में बाघ की मौजूदगी है या किसी दूसरे वन्यजीव को ग्रामीणों ने बाघ समझ लिया है।
अधिकारियों का कहना है कि ठोस साक्ष्य मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। बलिया गांव में जगराज सैनी को घर से खींचकर ले जाने और उनकी मौत के बाद ग्रामीणों के बीच हमलावर वन्यजीव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। गांव के चंद्रपाल सिंह का कहना है कि तेंदुआ आमतौर पर किसी व्यक्ति को घर से खींचकर नहीं ले जाता।
उनका मानना है कि उनके भाई जगराज को घर से खींचकर ले जाने वाला वन्यजीव बाघ हो सकता है। गांव के राहुल सिंह भी विरमो देवी, मिथलेश सैनी और जगराज पर हुए हमलों के लिए बाघ की आशंका जता रहे हैं। ग्रामीणों की इस आशंका को बलिया से सटे बिजनौर के रैनी वन क्षेत्र की वजह से भी जोड़ा जा रहा है।
रैनी के जंगल में विभिन्न प्रकार के वन्यजीव पाए जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे में बाघ की आवाजाही से पूरी तरह इन्कार नहीं किया जा सकता। वन संरक्षक आदर्श कुमार ने बताया कि मंडल के सभी जिलों की टीमें निगरानी में लगी हैं। जगराज को घर से खींचकर ले जाने की घटना का भी अध्ययन किया जा रहा है। प्रथम दृष्टया हमले करने वाला वन्यजीव व्यस्क और काफी स्वस्थ प्रतीत हो रहा है। हस्तिनापुर वाइल्ड लाइफ, लखीमपुर खीरी आदि से भी कर्मचारी बुलाए गए हैं।
आसान शिकार की तलाश में आबादी की तरफ आ सकता है बाघ
विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ सामान्यतः एकांतप्रिय और अपने क्षेत्र में रहने वाला वन्यजीव है। वह आमतौर पर मनुष्यों से दूरी बनाए रखता है और शिकार के लिए जंगल, घास के मैदान या घने वन क्षेत्र को पसंद करता है। बाघ मुख्य रूप से रात या सुबह-शाम अधिक सक्रिय रहता है।
पर्याप्त प्राकृतिक शिकार उपलब्ध होने पर वह सामान्यतः मानव बस्तियों से दूर रहता है। घायल, बूढ़ा या कमजोर बाघ आसान शिकार की तलाश में आबादी के करीब आ सकता है। किसी क्षेत्र में लगातार शिकार मिलने पर उसकी आवाजाही उसी इलाके में बढ़ सकती है। बाघ का व्यवहार उसके उम्र, स्वास्थ्य, भोजन और आसपास के पर्यावरण पर निर्भर करता है।
वन विभाग ने शासन को भेजी रिपोर्ट, आदमखोर घोषित हो सकता है तेंदुआ
मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में तीन महिलाओं समेत चार लोगों जान चले जाने के मामले को गंभीरता से लेकर तेंदुए को आदमखोर घोषित करने की दिशा में वन विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। वन विभाग ने अब तक की घटनाओं, छानबीन और मौके से मिले तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
शासन के आला अधिकारियों से चर्चा के बाद तेंदुए को आदमखोर घोषित करने पर अंतिम निर्णय होगा। वन विभाग इस संभावना पर भी काम कर रहा है कि सभी हमलों के पीछे एक ही तेंदुआ हो सकता है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, तेंदुआ तीन-चार दिन के अंतराल पर हमला कर रहा है। उसके छिपने का ऐसा ठिकाना होने की आशंका है, जहां टीम लगातार तलाश के बावजूद नहीं पहुंच पा रही है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार तेंदुआ एक बार शिकार करने के बाद कई दिनों तक आराम से रह सकता है। ऐसे में भूख लगने पर उसके दोबारा बाहर निकलने की संभावना रहती है। वन विभाग इसी व्यवहार को ध्यान में रखकर उसकी गतिविधियों का आकलन कर रहा है। वन संरक्षक आदर्श कुमार ने बताया कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक को घटनाक्रम और जांच में मिले तथ्यों की पूरी रिपोर्ट भेज दी गई है। उम्मीद है कि एक-दो दिन में इस संबंध में निर्णय हो जाएगा।
नौगावां तगा के बाग में टहलता दिखा तेंदुआ, ग्रामीणों में दहशत
जागरण संवाददाता, अमरोहा: नौगावां सादात के नौगावां तगा गांव में शनिवार रात तेंदुआ बाग में टहलता दिखाई दिया। जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई। कुछ युवकों ने तेंदुए का वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर दिया। डीएफओ राजीव कुमार ने बताया गांव में वन विभाग की टीम भेजकर तेंदुए की मौजूदगी की जांच कराई जाएगी।
जिले में इन दिनों तेंदुए की दहशत बनी हुई है। रजबपुर के गांव पीठखेड़ा, कांकरसराय, नौगावां सादात और मंडी धनौरा में लगातार तेंदुआ दिखाई देने की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर तेंदुए के लोगों पर हमलावर होने की घटनाएं भी हो चुकी हैं। इसके चलते ग्रामीण खेतों में काम करने से भी कतरा रहे हैं।
शनिवार रात नौगावां तगा में तेंदुआ दिखाई देने की सूचना मिलते ही ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया। एहतियात के तौर पर लोगों ने बच्चों को अकेले घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी है। वहीं, रात के समय ग्रामीण खेतों की ओर जाने से भी बच रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार तहसील क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी का यह पहला मामला नहीं है।
इससे पहले जमना खास, बसेड़ा पेली चौहान, मुनीमपुर समेत कई गांवों में भी तेंदुआ दिखाई दे चुका है। लगातार तेंदुए की सक्रियता से ग्रामीणों में चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने के लिए जंगल में पिंजरा लगाने की मांग की है।
तेंदुए का खौफ, खेतों पर नहीं जा रहे किसान
स्वार के गांव सीतारामपुर और आसपास के जंगलों में लंबे समय से तेंदुए की मौजूदगी की चर्चाओं, उसके देखे जाने की घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत है। इसके खौफ का असर अब ग्रामीणों के रोजमर्रा के कामकाज पर भी साफ दिखाई देने लगा है। किसान खेतों में जाने से कतरा रहे हैं, वहीं अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। जंगल और खेतों की ओर जाने वाले ग्रामीण अकेले जाने के बजाय समूह बनाकर निकल रहे हैं।
बताते हैं कि गन्ने के खेतों में बारिश का पानी भर जाने के कारण तेंदुए आबादी की ओर भाग रहे हैं। मसवासी क्षेत्र से उत्तराखंड भी सटा हुआ है और वन क्षेत्र भी पास में पड़ता है, जिससे उत्तराखंड की सीमा पार कर तेंदुए आबादी की ओर घुस आते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, सीतारामपुर के आसपास जंगल और खेतों में पिछले काफी समय से तेंदुए की आवाजाही देखी जा रही है।
कई बार ग्रामीणों ने जंगल और खेतों के आसपास तेंदुआ दिखाई देने की बात कही है। इससे गांव में भय का माहौल लगातार बढ़ता जा रहा है। खेती-किसानी से जुड़े कार्य समय पर करना ग्रामीणों की मजबूरी है, लेकिन तेंदुए के डर के कारण किसान अकेले खेतों पर जाने से बच रहे हैं। विशेषकर सुबह और शाम के समय खेतों की ओर जाने में ग्रामीण अधिक सावधानी बरत रहे हैं।
तेंदुए की आशंका का असर बच्चों की दिनचर्या पर भी पड़ा है। अभिभावक बच्चों को अकेले घर से बाहर भेजने से बच रहे हैं। जंगल और खेतों से सटे रास्तों पर बच्चों की आवाजाही को लेकर परिजन विशेष निगरानी रख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए की मौजूदगी की आशंका के चलते बच्चों को अकेले खेलने या किसी काम से बाहर भेजना जोखिम भरा लग रहा है।
ग्रामीणों ने वन विभाग पर पर्याप्त निगरानी नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग की ओर से केवल पिंजरा लगाकर खानापूर्ति की जा रही है। महान जगदीश गिरी महाराज ने बताया कि सीतारामपुर क्षेत्र के जंगलों में काफी समय से तेंदुओं की आवाजाही बनी हुई है।
इससे ग्रामीणों में लगातार भय बढ़ रहा है। खेतों में फसल की देखभाल, सिंचाई और अन्य कृषि कार्य जरूरी हैं, लेकिन तेंदुए के डर से किसान अकेले खेतों पर जाने से बच रहे हैं। उन्होंने वन विभाग से क्षेत्र में लगातार गश्त कराने और तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने की मांग की।
ग्रामीणों ने मांग की कि जंगल और आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास वन कर्मियों की निगरानी बढ़ाई जाए। तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि होने पर उसे पकड़ने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए।
वन रेंजर ठाकुर विजय सिंह ने बताया कि जंगल क्षेत्र में तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगवाया गया है। तेंदुए को पकड़ने के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं। वन कर्मियों को क्षेत्र में लगातार निगरानी रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। तेंदुए को शीघ्र पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
तेंदुए से बचे राकेश बोले- विश्वास नहीं हो रहा वह जिंदा है
संस, स्वार: शुक्रवार शाम तेंदुए के हमले में घायल हुए किसान राकेश सैनी ने बताया कि तेंदुए के हमले की घटना के बाद से वह बेहद डरे हुए हैं। रात में सोने के दौरान भी सपने में तेंदुआ दिखाई देता है।
उन्होंने बताया कि तेंदुए के झपट्टे से बचने के बाद उन्हें खुद विश्वास नहीं हो रहा कि वह जिंदा हैं। तेंदुए को सामने देखकर उन्होंने बचने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, लेकिन ऊपरवाले ने उन्हें दोबारा जीवनदान दिया। घटना के बाद अब खेत पर जाने में भी डर लग रहा है। परिवार के लोग बच्चों को भी अकेले बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। जिंदगी में पहली बार इतने करीब से देखा है तेंदुआ। बचने के बाद एक सपना सा लग रहा है ओर दिल में डर भी बैठा हुआ है।
क्षेत्र में तेंदुए की आवाजाही की चर्चा और उसके दिखाई देने की घटनाओं से ग्रामीणों में डर बढ़ता जा रहा है। खेतों में फसल खड़ी है और उसकी देखभाल के लिए किसानों को रोजाना खेतों पर जाना पड़ता है, लेकिन तेंदुए के भय के कारण अकेले खेत पर जाने की हिम्मत नही होती। किसान समूह बनाकर ही खेतों की ओर जा रहे हैं। वन विभाग को दिन-रात गश्त बढ़ाकर ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।- संदीप सिंह
तेंदुए की दहशत का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी परिवार चिंतित हैं। जंगल और खेतों के आसपास से गुजरने वाले रास्तों पर बच्चों को अकेले भेजने से परिजन डर रहे हैं। शाम होते ही ग्रामीण अपने बच्चों को घरों के अंदर रहने की हिदायत देते हैं। तेंदुए के पकड़े जाने तक इसी तरह भय का माहौल बना रहेगा। वन विभाग को गंभीरता दिखाते हुए प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।- अमित सैनी
सीतारामपुर और आसपास के जंगलों में काफी समय से तेंदुओं की आवाजाही की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों में लगातार भय बढ़ रहा है। किसान खेती-किसानी के जरूरी कार्य करने के लिए मजबूरी में खेतों पर जाते हैं, लेकिन तेंदुए के डर से अकेले जाने से बचते हैं। सुबह और शाम के समय खतरा अधिक महसूस होता है। वन विभाग को जंगल और आबादी के आसपास लगातार गश्त करानी चाहिए तथा तेंदुए को पकड़ने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।- महंत जगदीश गिरी महाराज
तेंदुए की मौजूदगी को लेकर गांव में काफी समय से भय का माहौल है। ग्रामीणों को अपने बच्चों और परिवार की सुरक्षा की चिंता सताती रहती है। जंगल से सटे खेतों में काम करने वाले किसान भी सावधानी बरत रहे हैं। कई लोग अकेले खेतों पर जाने के बजाय दूसरे ग्रामीणों के साथ जाते हैं। वन विभाग को केवल खाली पिंजरा लगाने तक सीमित न रहकर नियमित निगरानी करनी चाहिए। तेंदुए को जल्द पकड़कर ग्रामीणों को भय से राहत दिलाई जानी चाहिए।- चीनू परमार
