Karwa Chauth Sargi: अब सिर्फ फेनी-मठरी नहीं, करवा चौथ की सरगी थाली में बढ़ रहा ड्राई फ्रूट्स और मखाने का रुझान
करवा चौथ पर सरगी की थाली में अब पारंपरिक पकवानों के साथ फल, मेवे और मखाने जैसे सेहतमंद विकल्प शामिल ...और पढ़ें

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HighLights
दिनभर निर्जला व्रत रखने से पहले पौष्टिक खानपान पर जोर दे रहीं महिलाएं
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। करवा चौथ पर सरगी की थाली में अब सिर्फ मिठास और पारंपरिक पकवान ही नहीं, सेहत का ख्याल भी शामिल हो रहा है। सास की ओर से बहू को दी जाने वाली सरगी जहां स्नेह, आशीर्वाद और पारिवारिक परंपरा का प्रतीक है, वहीं बदलती जीवनशैली ने इसकी थाली में खानपान के नए विकल्प भी जोड़ दिए हैं।
फेनियां, मठरी और मिठाइयों के साथ फल, बादाम, अखरोट, किशमिश और मखाने जैसी चीजों को भी जगह दी जा रही है। महिलाओं की कोशिश है कि परंपरा निभाने के साथ व्रत से पहले ऐसा भोजन करें, जिससे शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिल सके।
करवा चौथ की तैयारियों के बीच महिलाओं के लिए सरगी की थाली सजाना भी खास महत्व रखता है। उनके लिए यह सास बहु और घर की बुजुर्ग महिलाओं के प्रेम का प्रतीक है।
तैयारी कर रही महिलाओं के अनुसार पहले जहां पारंपरिक पकवानों से थाली तैयार की जाती थी, वहीं अब उसमें पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
महिलाएं अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार सरगी तैयार कर रही हैं। खासकर दिनभर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह के खानपान को लेकर पहले से तैयारी कर रही हैं।
परंपरा के इस बदलते स्वरूप में सरगी का भाव वही है, लेकिन थाली में शामिल होने वाली चीजें समय के साथ बदल रही हैं। महिलाएं स्वाद, परंपरा और सेहत के बीच संतुलन बनाकर करवा चौथ की तैयारी कर रही हैं।
बाजारों में हैम्पर भी हो चुके तैयार
बदलते स्वरूप और महिलाओं की सरगी थाली की डिमांड का देखते हुए बाजारों में भी हैम्पर मिलने शुरु हो गए हैं। सिविल लाइंस स्थित एक दुकान के विक्रेता विनय ने बताया कि सरगी थानी 800 से 4 हजार तक के दामों में बनवाई गई हैं।

सरगी करवा चौथ की परंपरा से जुड़ा अहम हिस्सा है। हमें पहले हमारी सांस और बुजुर्ग महिलाएं घर पर मठरी और गुड़ आदि से बने पकवान देती थी। परंपरा आज भी वहीं है लेकिन अब सेहत से जोड़कर इसमें ड्राई फ्रूट्स आदि एड करके इसे और खूबसूरत बना रहे हैं। - भावना धवन, एमडीए।
त्योहार की तैयारियों में पारंपरिक पकवानों के साथ संतुलित खानपान की सोच महिलाओं की बदलती प्राथमिकताओं को दिखाती है। सरगी की थाली अब केवल रस्म निभाने का माध्यम नहीं, बल्कि व्रत की शुरुआत से पहले खानपान पर ध्यान देने का अवसर भी बन रही है। - श्वेता, सिविल लाइंस।
