मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। Jat Reservation Movement : प्रधानमंत्री द्वारा तीन कृषि कानून वापस ले लिए गए हैं। बावजूद इसके किसान आंदोलनरत हैं। एमएसपी व अन्य मांगों को लेकर धरने पर हैं। ऐसे में अब विधानसभा चुनाव से पहले जाट आरक्षण आंदोलन का ऐलान कर दिया गया। यदि आरक्षण आंदोलन ने तेजी पकड़ी तो निश्चित ही वह किसान आंदोलन को प्रभावित करेगा। यह भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत व राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत को दोराहे पर लाकर खड़ा कर सकता है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक का मानना है कि टिकैत बंधु बिरादरी के नाते उनके साथ मंच साझा करेंगे। जल्दी ही शामली में बिरादरी की पंचायत होगी। हर मुद्दे से बड़ा जाट आरक्षण का मुद्दा है।

वर्ष 2011 में जाट आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर तत्कालीन बसपा सरकार व केंद्र में यूपीए सरकार को बैकफुट पर लाने वाले जाट नेता यशपाल मलिक अमरोहा आए थे। विधानसभा चुनाव की आहट शुरू होते ही उन्होंने फिर से आरक्षण का राग छेड़ा है। एक दिसंबर से आंदोलन की शुुरुआत का ऐलान कर गए। परंतु इस सब के बीच वह किसान आंदोलन व सपा-रालोद गठबंधन को चुनौती भी मान रहे हैं। दैनिक जागरण से उन्होंने जाट आंदोलन में टिकैत बंधु की भागीदारी पर बात की। कहा क‍ि मौजूदा हालात में यह चुनौती जरूर है, क्योंकि किसान आंदोलन में जाटों की तादाद अधिक है। जिस तरह से कानून वापस हुए हैं। निश्चित ही एमएसपी व अन्य मांग भी जल्दी पूरी होंगी। हम भी किसान आंदोलन में शामिल रहे हैं। पूरी उम्मीद है, टिकैत बंधु भी हमारे साथ रहेंगे। कहा कि यदि किसान आंदोलन भी खत्म नहीं हुआ तो कम से कम बिरादरी के नाते ही आरक्षण आंदोलन में राकेश व नरेश टिकैत को आना होगा। जल्दी ही शामली में आरक्षण को लेकर जाटों की पंचायत बुलाई जाएगी। उसमें सारे पत्ते खुलकर सामने आएंगे। बिरादरी को बंटने नहीं दिया जाएगा। उसके बाद अगली रणनीति बनाई जाएगी। श्री मलिक ने कहा कि हम आरक्षण आंदोलन से किसान आंदोलन को प्रभावित नहीं होने देंगे। सपा-रालोद गठबंधन के सवाल पर कहा कि यह बेहतर है। पश्चिमी यूपी में जाट राजनीतिक परिदृश्य बदलते हैं। परंतु हर गठबंधन व आंदोलन से बड़ा मुद्दा अब आरक्षण का मुद्दा होगा। 

Edited By: Narendra Kumar