मुरादाबाद [प्रदीप चौरसिया]। कोरोना संक्रमण के दौरान क्वार्टर खाली नहीं करने वाले सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों को रेलवे बोर्ड ने राहत दी है। निर्धारित समय से अधिक समय तक क्वार्टर में रहने के बाद भी दंड किराया (पैनल रेंट) नहीं लिया जाएगा। यह सुविधा बाहर तबादले हुए कर्मचारियों को भी मिलेगी।

रेलवे के नियम के अनुसार र‍िटायर होने के एक माह बाद कर्मचारी को क्वार्टर खाली करना होता है। जिस कर्मचारियों का बाहर तबादला हो जाता है, वह अधिकतम दो माह तक क्वार्टर में रह सकता है। इस अवधि में कोरोना के कारण क्वार्टर खाली नहीं किया तो रेल प्रशासन दंड किराया वसूल करता है। यह सामान्य किराया से दस गुणा अधिक होता है। क्वार्टर खाली नहीं करने के कारण र‍िटायर कर्मी का बकाया राशि का भुगतान रोक दिया गया। कोरोना की प्रथम लहर का असर मार्च 2020 से लेकर सितंबर 2020 तक रहा। इसी तरह से द्वितीय लहर का असर मार्च 2021 से मई 2021 तक रहा। इस दौरान मुरादाबाद रेल मंडल के 293 रेलवे कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए। जबकि देश भर में दोनों लहर के दौरान हजारों रेलवे कर्मचारी र‍िटायर हुए हैं। काफी कर्मचारियों का बाहर तबादला हुआ था। ट्रेड यूनियन कोरोना के संक्रमण के कारण क्वार्टर खाली नहीं कराने की मांग कर चुके हैं।

रेलवे बोर्ड के उप निदेशक स्थापना (जी) एमपी मीना ने 26 जुलाई 2021 को पत्र जारी किया है। इसमें कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान र‍िटायर कर्मचारी या बाहर तबादला हुए कर्मचारी क्वार्टर खाली नहीं कर पाए हैं, ऐसे कर्मचारियों से दंड किराया नहीं लिया जाएगा। उनसे सामान्य किराया लिया जाएगा। जिस कर्मचारी से दंड किराया लिया गया है, उससे सामान्य किराया की कटौती कर शेष किराया वापस कर दिया जाएगा। सेवानिवृत्त कर्मचारियों की रोकी गई राशि का भुगतान करने व बाहर तबादला किए गए कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं की जाएगी। कोरोना संक्रमण के कारण कर्मचारी अधिकतम 15 माह क्वार्टर में रह सकते हैं। इस आदेश के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत मिलेगी। नरमू के मंडल के मंडल मंत्री राजेश चौबे ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारी क्वार्टर खाली नहीं कर पाए हैं, उनसे पैनल रेंट नहीं लेने की मांग की गई थी। उसी के आधार पर रेलवे बोर्ड ने आदेश जारी किया है। 

Edited By: Narendra Kumar