मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। आयकर रिटर्न भरने की तारीख बढ़ा दी गई है, लेकिन जुलाई के बाद रिटर्न दाखिल करने वालों को दंड ब्याज देना पड़ेगा। पोर्टल नहीं चलने से रिटर्न भरने वाले को परेशानी का सामना करना पड़  रहा है।

वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई है। कोरोना संक्रमण व आयकर रिटर्न का पोर्टल देरी से शुरू होने के कारण रिटर्न भरने की तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दी गई है। इससे आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों को राहत म‍िली है। लेकिन 31 जुलाई के बाद रिटर्न दाखिल करने पर लगने वाले दंड ब्याज पर कोई राहत नहीं दी गई है। आयकर अधिनियम 1961 में तीन धारा 234 ए, 234 बी और 234 सी है, जो समय से रिटर्न व आयकर जमा नहीं करने पर दंड ब्याज लेने का प्रावधान है। रिटर्न दाखिल करने की तारीख बढ़ाने के बाद इन्‍हें शिथिल नहीं किया है। 31 जुलाई के बाद रिटर्न दाखिल करने वालों को जमा आयकर के आधार पर एक फीसद मासिक दंड ब्याज देना पड़ेगा। 30 सितंबर को रिटर्न दाखिल करने वाले आयकरदाता को दो फीसद दंड ब्याज देना पड़ेगा। हालांकि यह दंड ब्याज एक लाख से अधिक का आयकर देने वालों से लिया जाएगा। इसके कम राशि वाले आयकरदाता से दंड ब्याज नहीं लिया जाएगा। आयकर की धारा 234 बी के तहत कोई आयकर दाता एडवांस टैक्स कम या समय से नहीं जमा करता है,  तो उसे एक फीसद की दर से दंड ब्याज देना पड़ता है। ऐसे आयकरदाता से एक अप्रैल से शेष राशि जमा करने की तारीख तक दंड ब्याज लिया जाता है। धारा 234 सी कंपनी द्वारा समय से एडवांस टैक्स जमा नहीं करने पर दंड ब्याज लेने का प्रावधान है।

नियम के जानकार आयकरदाता 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे दंड ब्याज देने से बच सकते हैं। पोर्टल ठीक तरह से काम नहीं करने के कारण रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए रहे हैं। आयकर परीक्षेत्र में 1.75 लाख आयकरदाता है। वरिष्ठ कर अधिवक्ता एके सिंघल ने बताया कि सरकार ने रिटर्न दाखिल करने की तारीख 30 सितंबर तक बढ़ाई है, लेकिन 31 जुलाई के बाद रिटर्न दाखिल पर दंड ब्याज देने के नियम को शिथिल नहीं किया गया है। 

Edited By: Narendra Kumar