रामपुर (मुस्लेमीन)। उत्तर प्रदेश के तीन हजार मदरसों की मान्यता में फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है। मानक पूरे न होने के कारण मदरसा वेब पोर्टल पर इनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका। अब ऐसे मदरसे नए सिरे से आवेदन कर मान्यता लेना चाहते हैं। लेकिन, सूबे में मदरसों की मान्यता देने पर ही रोक लगी है।मदरसों की मान्यता और छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़े के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। इसे रोकने के लिए उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने 2017 में मदरसा वेब पोर्टल लांच किया।

परिषद ने यह अनिवार्य कर दिया कि सभी मदरसों को मदरसा वेब पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना है। रजिस्ट्रेशन के लिए मानक भी तय कर दिए। वेब पोर्टल पर आवेदन के बाद लंबे समय तक सभी मदरसों की जांच पड़ताल की गई तो प्रदेश भर में करीब तीन हजार मदरसे फर्जी पाए गए। इन मदरसों ने पहले मानक पूरे किए बिना ही रजिस्ट्रेशन करा लिया था। प्रदेश में पहले 19123 मदरसे पंजीकृत थे, मदरसा वेब पोर्टल पर 16277 मदरसे ही पंजीकृत हो सके हैं। रामपुर में भी 321 मदरसे संचालित हैं, जबकि 100 से ज्यादा मदरसे ऐसे हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका है। ये मदरसे मान्यता लेने के लिए प्रयासरत हैं। रामपुर में मदरसों में 40 हजार छात्र पढ़ते हैं, जबकि प्रदेशभर में 20 लाख छात्र पढ़ते हैं। 

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मोहम्मद खालिद का कहना है कि मान्यता के लिए मदरसा शिक्षा परिषद ने मानक तय कर रखे हैं। प्राइमरी स्तर के मदरसे के लिए तीन कमरे, जूनियर हाई स्कूल सत्र के लिए छह कमरे और हाईस्कूल स्तर के मदरसे के लिए 10 कमरे होना अनिवार्य हैं। इसके साथ ही प्राइमरी स्तर के मदरसे में कम से कम 60 छात्र होने चाहिए। नए मदरसों की मान्यता पर जुलाई 2016 से रोक है, इसलिए मान्यता नहीं दी जा रही है।

मदरसा एजूकेशन पोर्टल बन रहा

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह का कहना है कि मदरसों में फर्जीवाड़ा खत्म करने के लिए ही मदरसा वेब पोर्टल बनाया गया। इसके जरिए मदरसों का पूरा रिकार्ड उपलब्ध कराया गया है। सरकार की योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। मदरसों में अब एनसीइआरटी का सिलेबस पढ़ाया जा रहा है। लॉकडाउन में ऑनलाइन क्लास लगाई जा रही हैं। इसके लिए मदरसा एजुकेशन पोर्टल भी तैयार किया जा रहा है। इससे मदरसे के छात्रों को ऑनलाइन तालीम और बेहतर दी जा सकेगी।

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