मुरादाबाद, जेएनएन। चुनाव की जंग जीतने के लिए प्रत्याशी दिन रात मेहनत में जुटे हैं। न भूख की चिंता न प्यास की और ना ही आराम। सुबह से शाम तक जनसंपर्क, सभाएं, रणनीति तैयार करने से लेकर व्यवस्था संभालने तक में जुटे हैं। कोशिश है प्रचार थमने तक अधिक से अधिक लोगों की बीच जाकर अपनी बात पहुंचाने की। काग्रेस प्रत्याशी इमरान प्रतापगढ़ी के साथ एक दिन भर घूमने के बाद प्रस्तुत है तरुण पाराशर की रिपोर्ट। सुबह साढ़े सात बजे से शुरू होती है दिनचर्या सुबह नौ बजे के करीब जिगर कालोनी के सी-43 आवास के बाहर गाडिय़ा की कतार लगी है। छोटे-छोटे ग्रुपों में खड़े लोग आपस में चर्चा कर रहे हैं, उन्हें इंतजार है काग्रेस प्रत्याशी इमरान प्रतापगढ़ी का। साढ़े नौ बजे वह आते हैं और सभी से दुआ सलाम होती है और फिर शुरू होता है चर्चाओं का दौर। प्रचार टीम के सदस्यों से दिनभर की कार्य योजना पर मंथन होता है। इसी बीच हल्का फुल्का नाश्ता भी कर लेते हैं। करीब एक घटा बिताने के बाद तैयार होने के लिए अंदर चले जाते हैं। फिर 11:30 बजे करीब वे नीचे आते हैं। 12 बजे तक उनका काफिला निकल पड़ता है। सबसे पहले वह पहुंचते हैं काठ विधान सभा क्षेत्र के बीबीपुर गाव में। मुख्य चौराहे पर पहुंचने के बाद वे वहा से लोगों से बात करते हुए पैदल आगे बढ़ते हैं। इसी दौरान जुमे की नमाज की अजान सुनाई देती है। बीबीपुर की जामा मस्जिद की ओर बढ़ चलते हैं। मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ते हैं। इसके बाद मस्जिद से थोड़ी दूरी पर जमा लोगों की भीड़ का संबोधित करते हैं। अपने चुनाव लडऩे का मकसद बताते हुए कहते हैं कि यह लड़ाई लखनऊ में सरकार बनाने की नहीं है, दिल्ली में सरकार बनाने और भाजपा की सरकार को हटाने की है। मोदी सरकार की नीतियों से हर वर्ग त्रस्त है और उनसे आप सभी मुक्ति चाहते हो या नहीं तो पीछे से हा में आवाज आती है। इसके साथ ही लोगों के बीच से कुछ कलाम पेश करने की माग उठती है और बात का मान रखते हुए अपने शेर सुनाते हैं। इसके बाद गाव के दूसरे छोर पर सभा में पहुंचते हैं और अपनी बात को शायरी के साथ जनता के बीच रखते हैं। इसके बाद से गाव सलावा, फरीदपुर भेंडी, महदूद कलमी और हाजी नगला टिगरी में सभा करते हैं। जगह-जगह रुककर लोगों से मिलते हैं, महिलाओं से बात करते हैं। सिर पर हाथ रखवाकर जीत के लिए दुआ और आशीर्वाद लेते हैं। युवाओं में दिखा सेल्फी का क्त्रेज इमरान प्रतापगढ़ी ने अपने शायरी से अलग पहचान बनाई है। मुरादाबाद के गावों में घूमते समय लोगों को परिचय बताने की जरूरत नहीं पड़ती। युवा उन्हें पहचानते हैं। जनसंपर्क से लेकर युवा उनके साथ सेल्फी लेने के आते हैं और वे किसी को निराश नहीं करते। दोपहर में नहीं खाते खाना प्रचार के दौरान इमरान लंच नहीं करते। जगह-जगह होने वाली सभाओं के बाद लोग उन्हें अपने घर आमंत्रित करते हैं। इस दौरान मिलने वाले चाय नाश्ता आदि से थोड़ा-थोड़ा खाते हैं। तबीयत बिगड़ी फिर भी नहीं रुके कार्यक्त्रम इमरान प्रतापगढ़ी कुछ बेहतर महसूस नहीं कर रहे थे। शाम हाजी नगला टिगरी के बाद उनके दो और गावों में सभाएं होनी थी, लेकिन तबीयत खराब होने के कारण मुरादाबाद लौट आए। सीधे घर पहुंचे, दवा खाने के बाद आधा घटे आराम किया और फिर लंगड़े की पुलिया पर रखी सभा में शामिल होने के लिए निकल पड़े। रात 12 बजे तक जनसंपर्क चला। इसके बाद घर लौटकर एक फिर शनिवार के कार्यक्त्रम पर मंथन करने के बाद डेढ़ बजे नींद लेने के लिए गए। सिर्फ 72 हजार पर चर्चा सभाओं का संबोधित करते हुए वे काग्रेस के घोषणा पत्र चर्चा भी नहीं करते। सिर्फ राहुल गाधी के गरीबों को 72 हजार रुपये सालाना दिए जाने के वादे को दोहराते हैं। विरोध के उठे स्वर फरीदपुर भेंडी में सभा के दौरान जब जिलाध्यक्ष डॉ. एपी सिंह नोटबंदी पर चर्चा कर रहे थे तो एक बुजुर्ग ने विरोध कर दिया। जिलाध्यक्ष ने उनका जवाब दिया, लेकिन इमरान प्रतापगढ़ी ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए खद माइक संभाला और नम्रता के साथ विरोध करने वालों से बात की। माइक से उनकी बातों का जवाब दिया। सभा खत्म होने के बाद उनसे गले मिले और सिर पर हाथ भी रखवाया।

Posted By: Jagran

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