मुरादाबाद : मैनाठेर स्थित इमरतपुर उधौ की नाजरीन भी हलाला के भंवर में फंस गई। जानकारी मिलने पर रविवार को मदद के लिए तीन तलाक पीडि़तों की पैरोकार समीना बेगम ने गांव में पहुंचकर नाजरीन की आपबीती सुनी और उसे न्याय का भरोसा दिलाया। पीड़िता के अनुसार मंगलवार को ससुर, पति, देवर, सास और ननद नाजरीन के घर पहुंचे थे और तय किया कि नाजरीन को देवर के साथ हलाला करना होगा, तब दोबारा से रियासत से निकाह करा दिया जाएगा। शर्त यह भी रखी गई कि यदि देवर पसंद न हो तो ससुर से भी हलाला कर सकती है। नाजरीन के इन्कार करने पर ससुराल पक्ष के लोगों ने थप्पड़ जड़ दिया। इसकी शिकायत संबंधित थाने में कर दी गई है। समीना ने बताया कि वह ससुराल पक्ष के लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई कराएंगी।

देवर की शिकायत पर तीन तलाक

नाजरीन ने बताया कि पांच जून 2011 को उसका निकाह सम्भल के नक्सा थाने के हिमामपुर निवासी रियासत से हुआ था। निकाह के बाद से ही देवर सलमान बुरी नजर रखने लगा था। पति से देवर की शिकायत करने पर उसे तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया। नाजरीन के दो बेटे और एक बेटी है। डेढ़ साल पहले नाजरीन ने थाने में तहरीर दी तो परिवार के लोग समझौता करने के बाद उसे वापस ले गए। फिर तीनों बच्चों को छीनने के बाद घर से निकाल दिया।

मुस्लिम महिलाओं के दोगली राजनीति कर रही कांग्रेस : समीना

मूलरूप से सम्भल की रहने वाल डॉ. समीना बेगम दिल्ली के जामिया नगर में रहती हैं, जो तीन तलाक का दंश झेल रही मुस्लिम महिलाओं को सशक्त आवाज देने की कोशिश में जुटी हुई हैं। वह तलाक-ए-बिद्दत (तीन तलाक) को अवैध घोषित करने के सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले के पहले से ही मिशन तलाक अभियान चला रही हैं। समीना महिलाओं की पीड़ा से अनजान नहीं है। उनका कहना है कि एक हजार लोगों के सामने निकाह करने वाला शौहर सिर्फ अकेले में तलाक देकर रिश्ता खत्म कर देता है। समीना में कहा कि कांग्रेस की दोगली राजनीति के चलते मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ नहीं मिल पा रहा है, जबकि भाजपा ने संसद में कानून बनाया था। कांग्रेस के विरोध करने पर उसमें संशोधन भी किया। उसके बाद भी कांग्रेस इसका विरोध कर रही है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने भी तलाक को गैर कानूनी बताया है।

मौलाना पर कार्रवाई न कराने की गुहार लेकर पहुंचे उलमा

ससुर के साथ हलाला कराने पर मां बनी मुरादाबाद की युवती ने मुरादाबाद में डीएम और एसएसपी को तहरीर की कॉपी सौंपी थी। मुरादाबाद की इस युवती की शादी सम्भल के थाना नखासा क्षेत्र में एक ट्रांसपोर्टर से सात दिसंबर वर्ष 2014 को हुई थी। आरोप है कि 25 दिसंबर 2015 को पीड़िता मारपीट कर घर से निकाल दी गई। इसके तीन दिन बाद तलाक दे दिया। सालभर बाद समझौता हुआ। हलाला की बात सामने आई। यह प्रक्रिया शुरू हुई तो निकाह ससुर के साथ पढ़ाया जाने लगा। युवती ने इससे मना किया लेकिन, मौलाना ने शरीयत का हवाला दिया। तब हलाला हुआ। ससुर ने संबंध बनाए, दूसरे दिन तलाक दे दिया। इसके बाद वह तीन माह दस दिन की इद्दत पर बैठ गई। इस बीच शौहर ने भी जबरन संबंध बना लिए। चंद रोज में दो मर्दो से संबंध बने, इसके बाद युवती गर्भवती हो गई। शौहर को शक हुआ कि बच्चा हलाला से हो गया है, तो उसने गर्भपात कराना चाहा। इन्कार करने पर पंद्रह दिन तक कैद में रखा। छह अक्टूबर को पुलिस युवती को घर से छुड़ाकर ले गई। इसके बाद उसने मायके में एक बेटे को जन्म दिया।

उलमा बना रहे दबाव

पीड़िता ने अपनी तहरीर में हलाला कराने वाले दो मौलाना को भी आरोपित बनाया है। इस पर कुछ मौलाना शुक्रवार को पीड़िता के घर गए। कहा कि निकाह पढ़ाने वाले मौलाना का कोई दोष नहीं है। उनके खिलाफ कार्रवाई न कराएं।

Posted By: Jagran