मुरादाबाद (आशुतोष मिश्र)। मुहल्ले में कहीं धुआं उठा या बिजली काटने वाली टीम दिखी तो करूला की गली नंबर छह में भीड़ का रुख होता है। हबीब फुरकान के कानों तक आवाज पहुंची तो समझ लीजिए की मुसीबत टलनी तय है। अगर बकाया भुगतान को लेकर बिजली विभाग की टीम आई तो वापस हो जाएगी। सरकारी अस्पताल में प्रसूता के घर वाले खुश हैं तो उसके साथ हबीब कहीं खड़े हैं। वह कोई खास नहीं आम आदमी हैं। अफसरों से बात करने और समस्या के निदान तक जूझते रहने का हुनर रखते हैं।

गली नंबर छह यानी जरूरतमंदों का ठिकाना

शहर के करूला गली नंबर छह यानी जरूरतमंदों का ठिकाना। सिविल डिफेंस के सदस्य हबीब फुरकान अभिव्यक्ति की आजादी के लिए लगे रहते हैं। सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले फुरकान अब एहसास सेवा संस्थान के सचिव भी हैं। गलशहीद थाने के सामने कपड़े की दुकान करने के दौरान दवा, इलाज और डिलीवरी के लिए परेशान लोग पहुंचते हैं तो चल पड़ते हैं। अस्पताल में गर्भवती, बच्चा, बुजुर्ग और बीमार का इलाज कराने वालों की हर समय मदद करते हैं। 

29 बच्‍चों को दि‍लाया दाखि‍ला 

जब इस तरह के प्रयास के वजह जानी तो बोल पड़े, मुझे खुशी होती है। मुहल्ले के मजदूर की बीवी को जिला महिला अस्पताल के बच्चा वार्ड से पिछले साल वहां के स्टाफ ने टरका दिया था। हमने बात की और उसके बाद जच्चा-बच्चा को इलाज मिला। दो साल में 29 बच्चों को आरटीई के तहत स्कूल में दाखिला दिलवाने। लोगों  के पहचान पत्र बनवाने, बिजली काटने वाली टीम से बात करके उनको मोहलत दिलाने और सरकारी योजनाओं को लेकर भटकने वालों के चेहरे पर जब खुशी मिलती है सुकून मिलता है।

Posted By: Narendra Kumar

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