गुजुफ्टा चुनाव: 'प्रो. एपी सिंह के गढ़' में सेंध! हिंदू कॉलेज से प्रो. मुकेश ने उतारा अपना पैनल
गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (गुजुफ्टा) चुनाव में प्रो. मुकेश कुमार ने हिंदू कॉलेज, मुरादाबाद से अपने पैनल की घोषणा ...और पढ़ें

हिंदू कॉलेज, मुरादाबाद
HighLights
गुजुफ्टा के चुनाव को अध्यक्ष पद के दोनों दावेदारों के पैनल जारी
मंडल के 17 कालेजों में बढ़ी सरगर्मी, 530 शिक्षक करेंगे मतदान
तेजप्रकाश सैनी, मुरादाबाद। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (गुजुफ्टा) के चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, मंडल के कालेजों में चुनावी सरगर्मी तेज होती जा रही है। 20 सितंबर को होने वाले चुनाव में अध्यक्ष पद को लेकर मुकाबला अब सीधे तौर पर दो पैनलों के बीच दिखाई देने लगा है।
हिंदू काॅलेज मुरादाबाद के भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण प्रकाश सिंह (प्रो.एपी सिंह) और वर्धमान काॅलेज बिजनौर के रसायन विभाग के प्रो. मुकेश कुमार ने अपने-अपने पैनल मैदान में उतार दिए हैं। दोनों पैनलों के सामने अब शिक्षक मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने जुट गए हैं।
गुरुवार को अध्यक्ष पद के दावेदार प्रो. मुकेश कुमार ने मंडल के सबसे बड़े हिंदू काॅलेज से अपने पैनल की घोषणा की। चुनावी दृष्टि से इस घोषणा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अध्यक्ष पद के दूसरे दावेदार प्रो. एपी सिंह भी हिंदू कालेज से ही हैं और वह पहले ही अपना पैनल घोषित कर चुके हैं।
ऐसे में मुकेश कुमार का हिंदू कालेज से पैनल घोषित करना केवल औपचारिक चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि एपी सिंह के प्रभाव वाले कालेज में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
दोनों पैनलों की घोषणा के बाद अब मुकाबला केवल अध्यक्ष पद के दो दावेदारों तक सीमित नहीं रह गया है। अलग-अलग कालेजों के शिक्षकों को पैनल में जगह देकर दोनों पक्ष मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में हैं।
खास बात यह है कि दोनों पैनल उन कालेजों में भी प्रचार के लिए पहुंच रहे हैं, जहां दूसरे पैनल का कोई प्रत्याशी मैदान में है। यानी जिस कालेज में प्रतिद्वंद्वी पैनल का दावेदार है।
वहां अपने पक्ष के शिक्षकों के साथ पहुंचकर समर्थन जुटाने की रणनीति अपनाई जा रही है। इससे चुनाव में व्यक्तिगत संपर्क के साथ कालेजवार राजनीतिक समीकरण भी अहम हो गए हैं।
प्रो. मुकेश के पैनल में महासचिव की दावेदार हिंदू कालेज से प्रियांशा सिंह
प्रो. मुकेश कुमार के पैनल में हिंदू कालेज की अर्थशास्त्र विभाग की प्रो. प्रियांशा सिंह को महासचिव पद के लिए मैदान में उतारा गया है। उपाध्यक्ष के तीन पदों पर केजीके कालेज की समाजशास्त्र विभाग की प्रो. ममता सिंह, साहू जैन कालेज नजीबाबाद के प्रो. अनिल कुमार और गुलाब सिंह हिंदू कालेज के मुहम्मद सुलेमान दावेदार हैं।
गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कालेज की डाॅ. प्रेमलता कश्यप संयुक्त सचिव, एनकेबीएमजी कालेज की डाॅ. अमिता चौधरी, एजीएम काॅलेज संभल के डाॅ. राजेश कुमार तथा फुपुक्टा प्रतिनिधि के रूप में आरएसएम काॅलेज धामपुर के डाॅ. हिमांशु त्रिपाठी और डाॅ. धर्मेंद्र सिंह को भी पैनल में शामिल किया गया है। कोषाध्यक्ष पद पर गांधी स्मारक डिग्री काॅलेज सुरजन नगर के डाॅ. अरविंद कुमार हैं।
डाॅ. जितेंद्र सिंह अध्यक्ष पद के दावेदार एपी सिंह के पैनल में महासचिव पद के दावेदार
वहीं प्रो. एपी सिंह के पैनल में अध्यक्ष पद पर स्वयं प्रो. अरुण प्रकाश सिंह, महासचिव पद पर आरएसएम काॅलेज धामपुर के डाॅ. जितेंद्र चौधरी, उपाध्यक्ष पद पर हिंदू कालेज के डाॅ. मुहम्मद साकिब, जेएस हिंदू कालेज अमरोहा के डा. मुकेश सिंह और एसबीडी कालेज धामपुर की डाॅ. अर्चना शामिल हैं।
संयुक्त सचिव पद पर डीएके डिग्री काॅलेज की डाॅ. नीतू सिंह, केजीके काॅलेज के डाॅ. राजीव कुमार और एसएम काॅलेज चंदौसी के डाॅ. सूरज शर्मा मैदान में हैं।
दोनों पैनलों में क्षेत्रीय समीकरण भी दिखने लगे
दोनों पैनलों की संरचना में भी क्षेत्रीय समीकरण साफ नजर आ रहे हैं। प्रो. एपी सिंह के पैनल में वर्धमान कालेज बिजनौर से कोई प्रत्याशी नहीं है, जबकि प्रो. मुकेश कुमार के पैनल में अमरोहा के किसी कालेज के शिक्षक को जगह नहीं मिली है।
ऐसे में दोनों पक्षों के सामने अपने-अपने कमजोर क्षेत्रों में समर्थन जुटाने की चुनौती होगी। यही वजह है कि आने वाले दिनों में कालेजवार संपर्क और शिक्षक समूहों के बीच बैठकों का दौर और तेज होने की संभावना है।
13 को नामांकन व 20 सितंबर को मतदान
गुजुफ्टा चुनाव में मंडल के 17 कालेजों के करीब 530 शिक्षक मतदान करेंगे। 13 सितंबर को नामांकन और 14 सितंबर को नाम वापसी होगी। नामांकन से पहले ही दोनों पैनल कालेज दर कालेज संपर्क कर शिक्षक हितों से जुड़े अपने एजेंडे को सामने रख रहे हैं।
दोनों पैनलों के मैदान में आने से चुनावी तस्वीर अब स्पष्ट हो गई है। ऐसे में 20 सितंबर का मतदान केवल पदाधिकारियों के चुनाव तक सीमित न रहकर शिक्षकों के बीच प्रभाव, संगठनात्मक पकड़ और कालेजवार समीकरणों की परीक्षा भी माना जा रहा है।
