मुरादाबाद, जेएनएन। बेबसी क्या होती है इस बारे में इंजीनियर विनीत सैनी के स्वजनों से बेहतर कौन जान सकता है। उत्तराखंड आपदा में लापता हुए विनीत सैनी को स्वजन सरकार के आदेश पर मृत मान चुके हैं। वे बेटे को अंतिम विदाई भी न दे सके, अब उसका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए जिलाधिकारी उमेश मिश्र से मिले हैं। ताकि समस्त औपचारिकताएं पूरी कराई जा सकें। 

काबिलेगौर है कि बीती सात फरवरी को उत्तराखंड के चमौली में ग्लेशियर फटने से आपदा आई थी। इस आपदा में अमरोहा के मुहल्ला सुबोधनगर निवासी डालचंद सैनी के बेटे इंजीनियर विनीत सैनी भी लापता हो गए थे। विनीत सैनी वहां जोशीमठ स्थित एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। काफी तलाश करने के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिल सका था। पांच दिन उत्तराखंड में रहकर स्वजन बेबस होकर घर लौट आए थे। उसके बाद उत्तराखंड सरकार द्वारा लापता लोगों के स्वजनों के ब्लड सैंपल लिए थे। ताकि डीएनए टेस्ट से लापता लोगों के शव की शिनाख्त की जा सके। अब सरकार द्वारा सभी लापता लोगों को मृत घोषित किया गया है। यानि स्वजनों की आस खत्म हो गई। लापता लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। इस क्रम में लापता इंजीनियर के पिता डालचंद सैनी व भाई विपिन सैनी डीएम उमेश मिश्र से मिले तथा उन्हें पत्र सौंपा। उन्होंने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराए जाने की औपचारिकताएं पूरी कराने की मांग की है। डीएम ने उन्हें दुख की इस घड़ी में हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। 

मां व बहन को आस है, लौटेगा विनीत

भले ही उत्तराखंड सरकार आपदा में लापता हुए लोगों को मृत घोषित कर चुकी है। परंतु स्वजनों का मन नहीं मान रहा कि उनका लाडला अब इस दुनिया में नहीं है। विनीत सैनी की मां व बहन को उम्मीद है कि एक दिन विनीत जरूर घर वापस लौटेगा। नगर के मुहल्ला सुबोधनगर में रहने वाले डालचंद सैनी के परिवार में पत्नी राधा रानी, बेटा विनीत सैनी, विपिन सैनी व बेटी काजल हैं। इंजीनियर विनीत सैनी उत्तराखंड के जोशीमठ में तैनात थे तथा सात फरवरी को आई आपदा में लापता हो गए थे। 

 

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