मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। Effects of social media use on children: इंटरनेट मीडिया पर इंफ्लुएंसर्स के सकारात्मक और नकारात्मक तथ्य बच्चे, युवा और बड़ों के जीवन पर प्रभाव डाल रहे हैं। इंटरनेट मीडिया के वीडियो पर हम इतना भरोसा करने लगे हैं कि अपने शिक्षक, चिकित्सक, परिजन और रिश्तेदार पर भी नहीं करते। बिना सत्यता जाने इंस्ट्राग्राम, फेसबुक, यूट्यूब, ट्विटर पर लाइक व कमेंट करते हैं।

बिना सोचे समझे लाइक और कमेंट करने से बचना चाहिए। दैनिक जागरण कार्यालय में प्रश्न पहर कार्यक्रम में इंटरनेट मीडिया पर इन्फ्लुएंसर्स का सही चुनाव विषय पर एमआइटी में आइटी विशेषज्ञ असिस्टेंट प्रोफेसर संजीव गुप्ता ने फोन पर आए प्रश्नों का उत्तर देकर समाधान किया।

प्रश्न : मेरा आठ साल का भतीजा देर रात तक जागकर इंटरनेट मीडिया से जुड़ा रहता है, क्या करें?

उत्तर: अभिभावक उससे प्यार से बात करें वह इंटरनेट मीडिया पर क्या देखता है। कहीं अपने फालोअर्स बढ़ाने या दूसरों की पोस्ट पर लाइक या अपनी प्रतिक्रिया देने के कारण तो नहीं जागता। यही इन्फलुएंसर्स से अपनी व दूसरों की विश्वसनीयता को बिना सोचे समझे बढ़ावा देते हैं।

प्रश्न : इंटरनेट यूज करते हैं, तो क्या सही और गलत है, इसका चयन कैसे करें?

उत्तर : बिना आवश्यक वाले तथ्य न देखें। एक बार अगर कोई तथ्य इंटरनेट मीडिया पर देखा तो वह साइट आपकी मनोदशा (हिस्ट्री) समझकर उससे संबंधित वीडियो बार-बार खुलते रहेंगे।

प्रश्न : कोरोना काल में शिक्षकों ने मोबाइल फोन की आदत बच्चों को डाली, घर में मां-बाप अपने काम निपटाने के लिए बच्चों को मोबाइल फोन पकड़वा देते हैं। इसका निस्तारण क्या है?

उत्तर : आजकल आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी का जमाना है। स्मार्ट सिटी को डवलप करना चाहते हैं लेकिन, आज की जरूरत के हिसाब से शहर स्मार्ट नहीं होगा तो भी हम पिछड़ जाएंगे। समझना ये है कि मोबाइल पर इंटरनेट मीडिया का उपयोग क्यों और किसके लिए कर रहे हैं। सकारात्मक पहलू के तथ्यों को अपनाएं, नकारात्मक से दूर रहें।

प्रश्न : मोबाइल फोन पर कोई लिंक आए तो यह गलत है या सही, इसका पता कैसे लगाएं?

उत्तर : मोबाइल पर फर्जी लिंक बहुत आ रहे हैं। इन पर विश्वास तब तक न करें, जब तक उसकी सत्यतता अच्छी तरह न जान लें।

प्रश्न : मोबाइल में प्ले स्टोर पर भी कुछ गलत एप होते हैं, वह बंद होने चाहिए या नहीं?

उत्तर : कोई भी कंपनी एप बनाती है तो नियम कानून को पहले समझती है। उस एप का इंस्टाल करने के बाद कई शर्तें होती हैं। शर्तों को लेकर यस और नो बिना देखे आगे न बढ़ें। कई बार दुरुपयोग असल जिंदगी पर भारी पड़ सकता है।

प्रश्न : एंड्राइड फोन क्या वास्तव में हमारी जरूरत बन गया है?

उत्तर : अगर जरूरी न हो तो एंड्राइड फोन न लें। कीपैड वाले मोबाइल फोन का उपयोग करें।

इनके रहे प्रमुख सवाल

दैनिक जागरण के कार्यक्रम बहुत से पाठकों ने फोन किया लेकिन, कुछ पाठक ऐसे रहे जिनके प्रश्‍न काफी अहम रहे। उनके पाकबड़ा निवासी अमन, लाइनपार निवासी तन्‍वय शर्मा, शंकरनगर निवासी एचपी शर्मा चंद्रनगर निवासी सौरभी, रामगंंगा विहार निवासी अंकुर और बुद्धिविहार निवासी विशाल रहे। 

Edited By: Vivek Bajpai

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