मुरादाबाद,जेएनएन। दिसंबर की तेज बरसात और चक्रवात ने आलू, सरसों और गेहंू की फसल बर्बाद कर दिया था। प्रशासन ने सर्वे भी कराया लेकिन, किसान अब तक मुआवजा और बीमा लाभ के लिए दर-दर भटक रहे हैं।चालू सीजन में आलू, सरसों और अन्य रबी फसलों की बर्बादी झेलने वाले किसानों की सुनने वाला कोई नहीं है। करीब डेढ़ लाख किसानों ने जिले में गेहंू की खेती की है लेकिन, महज 300 किसानों के नुकसान का सर्वे बीमा कंपनी ने किया है। केसीसी से कर्ज लेने वाले किसानों का ही बीमा प्रीमियम कटा है और वही किसान सरकारी मदद के हकदार बने हैं।

72 घंटे में सूचना नहीं देने पर किसानों ने खो दिया मौका

फसल की बर्बादी के 72 घंटे के भीतर टोल-फ्री नंबर पर किसानों को नुकसान की जानकारी देनी होती है। इस शर्त की वजह से जिले के हजारों किसान मुआवजा के हकदार नहीं बन पाए हैं। इससे गेहंू, सरसों और अन्य फसल गंवाने वाले हजारों किसानों को सहायता नहीं मिल सकी है। कुछ किसान तो तहसील, लेखपाल, बीमा कंपनी और कृषि विभाग का चक्कर काट रहे हैं।

वर्जन

गन्ना को केसीसी की शर्त पर बीमा का लाभ नहीं मिलता। अभी रबी के नुकसान पर राहत नहीं मिली है। तीन साल में दो लाख दस हजार किसानों को बीमा का लाभ मिला है।

ऋतुषा तिवारी, जिला कृषि अधिकारी

बोले किसान, झूठा है सरकार का एलान

13 दिसंबर के चक्रवात और बरसात और जनवरी माह में बूंदाबादी से सरसों, आलू और गेहंू की फसल बर्बाद हुई। मुआवजा और सरकारी सहयोग की पड़ताल में कई तथ्य सामने आए। किसान बोल पड़े, सरकार के एलान का कोई अर्थ नहीं है।

 

Posted By: Narendra Kumar

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