जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। ट्रेन में खुद को विजीलेंस अधिकारी बताकर एसी में सफर कर रहे यात्री को लेकर स्टेशन पर घंटों ड्रामा चला। हालांकि बाद में आरपीएफ में यात्री के खिलाफ बिना टिकट सफर करने का मुकदमा दर्ज कर जमानत दे दी गई।

काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस के मुरादाबाद स्टेशन पहुंचने से पहले टे्रन के कोच कंडक्टर ने एसी सेकेंड कोच में फर्जी विजीलेंस अधिकारी के सफर करने की सूचना कंट्रोल रूम को दी। टे्रन के मुरादाबाद पहुंचने पर यात्री को टिकट चेकिंग स्टाफ और आरपीएफ ने नीचे उतार लिया और आरपीएफ थाने ले जाया गया। वहां काफी देर पूछताछ चलती रही। टीटीई का कहना था कि यात्री उन्हें गाजियाबाद में मिला था और खुद को विजीलेंस अधिकारी बताकर सीट मांगी थी। उन्हें एसी सेकेंड कोच में सीट दे दी। ट्रेन चलने के बाद जब वे टिकट चेक करते हुए उनके पास पहुंचे और आइडी मांगी तो वे आइडी नहीं दिखा पाए। इसके बाद कंट्रोल रूम को फोन किया गया। थाने में यात्री की आइडी चेक की तो वह सेंट्रल एक्साइज में सुपरिटेंडेंट देहरादून में तैनात निकला। मुख्य टिकट निरीक्षक के मेमो पर आरपीएफ थाने में बिना टिकट सफर करने का रेलवे एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया।

घंटों चला ड्रामा

यात्री पर कार्रवाई को लेकर स्टेशन पर घंटों ड्रामा चला। आरपीएफ थाने में जब बताया गया कि रेलवे बोर्ड का फर्जी विलीलेंस आफीसर बनकर सफर कर रहा था, तो उसे जीआरपी के पास भेज दिया। जीआरपी ने तहरीर के आधार पर फर्जी विजीलेंस अधिकारी नहीं माना। उसके खिलाफ आरपीएफ में कार्रवाई होने की दलील देकर टरका दिया गया। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचना दी गई। प्रकार देर रात यात्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। वह पहले भी बरेली में बिना टिकट पकड़ा जा चुका है। 

Posted By: Narendra Kumar

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