रामपुर, जेएनएन। लखनऊ में तैनात एक आइपीएस अधिकारी से पूर्व सिपाही ने जान का खतरा बताया है। पूर्व सिपाही की शिकायत पर अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है, जिसमें उनके बयान होने हैं। बयानों के लिए पूर्व सिपाही ने लखनऊ आने से मना करते हुए प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है, जिसमें कहा है कि उन्हें अधिकारी से जान का खतरा है। इसके चलते वह लखनऊ नहीं आ सकते हैं। उनके बयान रामपुर में ही कराए जाएं।

गंज कोतवाली क्षेत्र के मुहल्ला घेर जानस खां पीला तालाब निवासी पूर्व सिपाही मोहम्मद रफी ने 29 अप्रैल 2015 को सिविल लाइंस कोतवाली में एक मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें आइजी अमिताभ ठाकुर, उनकी पत्नी नूतन ठाकुर, लखनऊ में तैनात दारोगा बिशन स्वरूप शर्मा और मॉडल कालोनी निवासी शहजादे खां को नामजद किया था। यह मामला आइपीएस अधिकारी से जुड़ा होने पर शासन ने भी उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश कर दिए हैं। जांच पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण लखनऊ सुजानवीर ङ्क्षसह को सौंपी गई है। जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ता पूर्व सिपाही को बयान के लिए 20 जनवरी को लखनऊ बुलाया है। पूर्व सिपाही का कहना है कि वह लखनऊ बयान देने नहीं जा सकते हैं। आरोपित आइजी वर्तमान में लखनऊ में ही तैनात हैं। ऐसे में उनकी जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने अपने बयान रामपुर में ही कराने के लिए प्रमुख सचिव गृह को पत्र भेजा है।  

Posted By: Narendra Kumar

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