मुरादाबाद (रईस शेख) : रामगंगा की बाढ़ से किसी का मकान ढह गया तो किसी की दीवार। बर्बादी का मंजर बयां करते-करते महिलाएं सुबक-सुबक कर रोई। गांव अबावकरपुर के बाशिंदे तो बाढ़ का नाम सुनते ही सिहर उठते हैं। कहते हैं कि बाढ़ का पानी आता है और तबाही मचा कर चला जाता है। मकान हो गए जमींदोज

इस बार गांव में तीन बार बाढ़ का पानी आया। अब भी निचले हिस्से में पानी है। कई मकान बैठ गए हैं और कइयों की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। ग्रामीण कहते हैं कि 15 अगस्त से अब तक बाढ़ से लाखों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है और गन्ने की फसल में भी 50 फीसद से अधिक नुकसान है। पशु भूखे हैं। उनके लिए जान जोखिम डालकर चारा लाना पड़ रहा है। आशाराम, रामगोपाल, राम सिंह, सुनील कुमार, रोहिताश, सूरजपाल कहते हैं कि मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बाढ़ आने से अब मजदूरी को भी नहीं जा रहे हैं। वह कहते हैं कि मकानों में दरारें पड़ने से हर वक्त गिरने का खतरा बना रहता है। एक-दूसरे का बने सहारा

बर्बादी का मंजर बयान करते हुए महिलाएं सुबक पड़ीं। कइयों के आंसू की धार बह निकली। रागिनी, सरोज, फूलवती व गोमती देवी बताया कि गांव में तीन-चार फीट पानी भर गया था। चूल्हे नहीं जले। ग्रामीणों ने आपस में ही एक-दूसरे की मदद की। कोई भी सरकारी कर्मचारी मदद को नहीं आया। बीते साल बाढ़ आने पर प्रशासन ने नाव भेज दी थी। लाखों रुपये की हुई क्षति

खमानी सिंह का कहना है कि खौफनाक मंजर था। अब भी निचले क्षेत्र में पानी भरा है। पूरा गांव बर्बाद हो गया। लाखों रुपये की क्षति हुई है। सतीश कुमार का कहना है कि चारा खत्म हो गया है। चार फीट पानी में घुसकर गन्ने की पत्ती ला रहे हैं ताकि, पशुओं का पेट भर जाए। नितिन कुमार ने बताया कि पशुओं के चारे की समस्या है। भैंस व गायें भूखी हैं। भरपेट चारा न मिलने से दूध देने की क्षमता कम हो गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में 30 फीसद गन्ने की फसल नष्ट

आर्थिक तंगी से अन्नदाता के हाथ बंधे हैं। गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हुआ है और बाढ़ ने खरीफ की फसल बर्बाद कर दी है। गन्ने की फसल में भी लगभग 30 फीसद नुकसान होने के कयास लगाए जा रहे हैं। कमोबेश लगभग दो लाख किसान परिवार आर्थिक तंगी की चपेट में हैं। किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। फसलों का वाजिब दाम नहीं मिल रहा है। आलू, टमाटर बेकद्री की मार झेल रहे हैं। गेहूं खरीद में दलालों का बोलबाला रहा है। सूबे की सरकार द्वारा मक्का क्रय केंद्र खोलने की घोषणा के बावजूद एक भी नहीं खोला गया है। किसानों को औने-पौने दामों में मक्का बेचनी पड़ रही है। रही-सही कमी बाढ़ ने पूरी कर दी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में धान, उड़द, मूंग की खेती नष्ट हो चुकी है। किसान संगठनों द्वारा आवाज बुलंद करने के बावजूद अन्नदाता की समस्याओं का निराकरण नहीं हो रहा है। चीनी मिलों पर बकाया

मंडल की चीनी मिलें किसानों का लगभग 15 सौ करोड़ रुपये दबाए बैठी हैं। भुगतान न होने से किसानों की आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो गई है। गन्ना मूल्य का भुगतान करने की मांग उठाई

गन्ना मूल्य का भुगतान न होने से मंडल के लगभग सवा छह लाख किसान प्रभावित हैं। किसानों के आवश्यक कार्य भी रुक गए हैं। गन्ना किसान देवेंद्र सिंह, मुकुट सिंह व खेम सिंह ने किसानों की आर्थिक स्थिति खराब बताते हुए गन्ना मूल्य का भुगतान कराने की मांग की है। भाकियू अराजनीतिक ने बुलाई महापंचायत

भाकियू अराजनीतिक असली के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरपाल सिंह व महासचिव महक सिंह ने समस्याओं के मद्देनजर महापंचायत बुलाने की बात कही है। उन्होंने आंदोलन एलान भी किया है। कसे हैं मिलों के पेंच : उप गन्ना आयुक्त

चीनी मिलों के पेंच कसे गए हैं। शासन को भी पत्र लिखा गया है। पेराई सत्र से पूर्व भुगतान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

- राजेश मिश्र, उप गन्ना आयुक्त रामगंगा फिर खतरे के निशान के करीब

दो दिन से शांत रामगंगा में फिर उफान आने लगा है। जलस्तर खतरे के निशान से करीब पहुंच गया है। बरसात हुई तो सोमवार की सुबह तक रामगंगा एक बार फिर खतरे के निशान को पार कर जाएगी। उधर गांव हृदयपुर लुढि़या में तीन मकान और क्षतिग्रस्त हो गए है। रायभूड़ तटबंध के डोले क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हसनपुर तटबंध के स्पर व पप्सरा ¨रग बांध के स्पर की नोज का कटान शुरू हो गया है। रविवार को खो बैराज से 37,662 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रविवार को सुबह छह बजे से रामगंगा का जलस्तर का बढ़ना शुरू हुआ जो रात तक जारी रहा। रात्रि दस बजे नदी खतरे के निशान से लगभग दस सेमी. नीचे बह रही थी। जबकि पहाड़ी व मैदानी क्षेत्र में बरसात होने से जलस्तर खतरे के निशान से पार होने के कयास लगाए जा रहे थे। राम किशोर, धन सिंह, मुहम्मद रिजवान ने बताया कि सुबह से पानी का बढ़ना जारी है। फसलें फिर डूबने लगी हैं। खरीफ की सभी फसलें नष्ट हो गई हैं। खतरे की नहीं है कोई बात : अधिशासी अभियंता

बरसात के पानी से रामगंगा का जलस्तर बढ़ने लगा है। बाढ़ सुरक्षा का कार्य तेजी से चल रहा है। खतरे की कोई बात नहीं है।

- मनोज कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड अब और कितना सितम देगी बाढ़

कई क्विंटल धान बह गया। गन्ना जो तैयार होने वाला था सब जमींदोज हो गया। मिट्टी की झोपड़ियां मिट्टी में ही मिल गई। शहर से सम्पर्क टूट जाने के कारण न तो सब्जियां आ पा रहीं न दूध। हालात यह है कि कांठ रोड से ठाकुरद्वारा जाने वाले कई गांवों में जिंदगी की रफ्तार बिल्कुल थम सी गई है। इन सबके बावजूद न तो कोई नेता अपनी शक्ल दिखाने आया और न जिला प्रशासन के जिम्मेदार।

कांठ रोड पर मोहब्बतपुर, मुस्तफापुर समेत कई गांवों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। लोगों का घर से निकलना बंद हैं। निकलते भी हैं तो बाढ़ के पानी को कम करने के लिए। बच्चे भी पढ़ाई छोड़ कर बाढ़ के पानी में ही उलझे हुए हैं। रास्ते पर कई भैंस मर चुकीं है लेकिन, संपर्क मार्ग बाधित होने के कारण प्रशासन की ओर से उनके मृत शरीरों को हटाने का कोई प्रबंध नहीं हो पा रहा है। इस रोड पर दुर्गध के कारण निकलना दूभर है। पानी भरने के कारण अब गांवों में बीमारियों के पनपने का भी खतरा मंडरा रहा है। जिंदगी को पटरी पर लाने की जद्दोजहद

मोहब्बतपुर गांव के तारिक खां का कहना है कि गांव में करीब 100 क्विंटल धान की फसल खराब हो चुकी है। ऐसे में रोजी-रोटी के लाले पड़ गए हैं। जितेंद्र कुमार का कहना है कि लोगों ने गन्ना लगाया था जो बारिश के कारण गिरकर खराब हो चुका है। प्रशासन की अनदेखी के बावजूद भी जैसे-तैसे गांव के लोग खुद ही जिंदगी को पटरी पर लाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। इसके बावजूद मौसम है कि दर्द पर दर्द देता जा रहा है। रुक-रुक कर हो रही बारिश अब ग्रामीणों की हिम्मत को भी तोड़ रही है। लोगों का कहना है कि जिन नेताओं को वोट दिया था वे शक्ल तक दिखाने नहीं आए वहीं, प्रशासन से भी अब कोई आस नहीं है।

Posted By: Jagran