मुरादाबाद: जनपद में कुत्तों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। एक के बाद एक हमलों से ग्रामीणों में भय पैदा हो गया। अब ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल भेजने से भी कतरा रहे हैं। सहेलियों के बताने पर पहुंचे परिजन, देर रात तक हालत रही गंभीर ताजा मामला कुंदरकी क्षेत्र के गांव पाडिया का है, यहां के निवासी मुहम्मद जान किसान हैं। उनकी बेटी गुलनाज (7) गांव के सरकारी विद्यालय में कक्षा एक की छात्रा है। गुरुवार सुबह वह घर से चंद कदम की दूरी पर स्थित आम के बाग से अमिया लेने सहेलियों के साथ जा रही थी। रास्ते में कुत्तों के झुंड ने मासूम पर हमला बोल दिया। साथ जा रही बच्चियों ने किसी तरह खुद को सुरक्षित कर गुलनाज के घर जाकर जानकारी दी। जब तक परिवार वाले पहुंचते उससे पहले ही वहां से निकल रहे लोगों ने कुत्तों के झुंड से मासूम को छुड़ाया। लहूलुहान हालत में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। फिलहाल बच्ची की हालत चिंताजनक बनी हुई है। पिता मुहम्मद जान ने बताया कि कुत्तों के आतंक से ग्रामीणों में दहशत का माहौल पैदा हो गया है। ग्रामीणों में कुत्तों को प्रशासन द्वारा न पकड़वाए जाने से नाराज़गी है। बताते चलें कि पहले भी कुत्तों के काटने से बच्चों की मौत हो चुकी है। दिन ढलते हो जाता है गलियों में सन्नाटा

-बच्ची के परिजनों ने बताया कि शहर से कुत्ते गांवों में छोड़ दिये गए हैं। इससे उनकी संख्या बढ़ गई है। सूर्यास्त होते ही कुत्तों के कारण लोग घरों में कैद हो जाते हैं। ये करें उपाय

- अकेले घर से न निकलें। कभी भी कुत्तों के दौड़ाने पर भागें नहीं, वहीं रुक जाएं।

-बाइक में बैठने के दौरान अपने पैरों का ध्यान रखें, क्योंकि कुत्ते अक्सर पैर पर ही हमला करते हैं।

-जरूरी काम होने पर जेब में खाने की चीजें रखें, कुत्ते मिलें तो खिला दें।

-बच्चों को अकेले न जाने दें। सुनसान स्थानों पर कुत्तों की संख्या अधिक होती है।

-कुत्ते के काटने पर जख्म को ठंडे पानी से धो दें। जख्म धोने के लिए साबुन इस्तेमाल कर सकते हैं।

-जख्म जितना अधिक साफ होगा, उतना ही लार की मात्रा खून में पहुंचने की कम सम्भावना रहेगी।

-डॉक्टर से संपर्क कर उसका सही इलाज करें, जल्द से जल्द वैक्सीन लगवा दें।

By Jagran