मुरादाबाद(प्रदीप चौरसिया) : अमूमन घर, मिठाई दुकानों और होटल-रेस्टोरेंट में एक ही तेल को बार-बार गर्म करके प्रयोग किया जाता है। कढ़ाई में घंटों तेल गर्म होता रहता है। ऐसे तेल में बने खाद्य पदार्थ खाने लायक नहीं होते हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट जारी करके भी कहा है कि दो से अधिक बार तेल गर्म करके प्रयोग करने पर सामग्री खाने लायक नहीं रहती है। इससे तेेल में टोटल पोलर कम्पाउंड (टीपीसी) जैसे विषैले तत्व बनने लगते हैं। इसके खाने से रक्तचाप, अल्जाइमर, मोटापा और लीवर से संबंधित बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। इस रिपोर्ट के बाद तेल कंपनियां आगे आई हैं और ऐसे तेल से डीजल बनाने की युक्ति निकाली है। इसके बाद अब जले हुए खाद्य तेल को फेंकने या दोबारा प्रयोग करने की जरूरत नहीं होगी। बल्कि तेल कंपनियां ऐसे तेल को खरीद लेंगी और जैव इंधन के रूप में डीजल तैयार कर बाजार में बेचेंगी। इसके लिए ब्लाक से तहसील स्तर पर कलेक्शन सेंटर बनाए जाएंगे।

खाद्य तेल से डीजल बनाने के लिए देश में कई स्थानों पर संयंत्र लगे हुए हैं। गांव-गांव से ऐसे तेल को खरीदने के लिए तेल कंपनियां ब्लाक स्तर तक कलेक्शन सेंटर खोलेगी। जहां कोई भी व्यक्ति प्रयोग किए गए या खराब हो चुके खाद्य तेल को बेच सकेगा। जले तेल की कीमत कंपनी की ओर से निर्धारित की जाएगी। कलेक्शन सेंटर खाद्य तेल से डीजल बनाने वाली यूनिट को भेजेगा। तेल कंपनियों ने जिला प्रशासन के सहयोग से इसके बारे में प्रचार शुरू कर दिया है।

जिला पूर्ति अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि इस्तेमाल किए जा चुके खाद्य तेल को बार-बार प्रयोग नहीं करने के लिए लोगों जागरुक करने का काम जल्द शुरू किया जाएगा। इसके लिए प्रचार वैन जिले को जल्द मिलने वाली है। साथ ही खाद्य तेल के कलेक्शन सेंटर भी खोले जाएंगे।  

Posted By: Narendra Kumar

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