मुरादाबाद, जेएनएन। पराली जलाएं नहीं गोशाला में दान करें। इसको लेकर ग्राम प्रधान और लेखपाल किसानों को जागरूक करेंगे। साथ ही पिछले सालों में जिन किसानों ने पराली जलाई। उनकी पराली निराश्रित गोशाला में विशेष रुप से भेजी जाएगी, चाहे वह दान करें या ना करें। पिछले वर्षों में ठाकुरद्वारा और मूंढापांडे क्षेत्र में पराली जलाने के मामले सामने आए थे। वर्ष 2018 में 25 और 2019 में 18 किसानों को पराली जलाते हुए सेटेलाइट के माध्यम से चिन्हित किया था।

एनजीटी के आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने पराली जलाने को लेकर दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। खरीफ की फसल काटने का वक्त आ गया है। इसको लेकर उत्तर प्रदेश सरकार अलर्ट हो गई है। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी का पत्र मिलते ही जिला कृषि विभाग ने पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों और लेखपालों को पत्राचार करना शुरू कर दिया है।

पराली जलाते पकड़े जाने पर लगेगा जुर्माना

दो एकड़ से कम खेत की पराली जलाने पर ढाई हजार और दो से पांच एकड़ क्षेत्र की पराली जलाने पर 5000 रुपये जुर्माना लगेगा। इससे अधिक पर 15000 रुपये वसूले जाएंगे। दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने पर कारावास भी हो सकता है। इस संबंध में पुलिस को भी अपने क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सक्रिय होना पड़ेगा।

जलाएं नहीं उपकरणों से करें निस्तारित

पराली को जलाने की बजाय अब ऐसी बाजार में आ गए हैं जिनसे पराली को खेत में ही निस्तारित किया जा सकता है। इन उपकरणों की खरीद पर समितियों को 80 फीसद और व्यक्तिगत रूप से खरीदने पर 50 फीसद का अनुदान(सब्सिडी) सरकार की ओर से मिलेगा। बाजार में 14 प्रकार के यंत्र हैं जिनके माध्यम से पराली को खेत में ज्योति कर उर्वरा शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। यंत्रों का चयन विभागीय पोर्टल के माध्यम से 31 अगस्त तक पूरा किया जाना है।

गोष्ठियां कराकर किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जाएगा साथ ही ग्राम प्रधान व लेखपाल भी अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों से पराली न जलाने के लिए प्रयास करेंगे।

ऋतुशा तिवारी, जिला कृषि अधिकारी

 

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