सम्भल (शोभित कुमार)। चार माह बाद देव जागेंगे। शुक्रवार को देवोत्थान एकादशी है। ऐसे में चारों ओर शहनाइयों की गूंज, उल्लास और धमाल नजर आएगा। इतना ही नहीं दर्जनों जोड़े एक-दूसरे के हमसफर बनेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में देवोत्थान पर शादियों की तैयारियां जोरों पर है। सभी बैंक्वेट हाल बुक करा दिए गए हैं। जबकि कुछ लोग अपने घरों के आसपास खाली पड़े मैदान व प्लाटों में टेंट लगाकर वैवाहिक कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं।

चार माह से क्षीर सागर में शयन कर रहे श्री हरि भगवान विष्णु शयन ङ्क्षनद्रा से शुक्रवार को देवोत्थान एकादशी के दिन जाग जाएंगे। जिसकी वजह से सहालग व अन्य शुभ कार्य भी विधिवत तरीके से शुरू हो जाएंगे। इसलिए देवोत्थान एकादशी पर अनसुलझी शादियां भी होने के कारण शहर व ग्रामीण क्षत्रों में बारातों की धूम रहेगी। क्योंकि इस दिन जबरदस्त सहालग है। इसके लिए लोगों ने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी थी और वैंक्वेट हालों को काफी समय पहले ही बुक कर दिया था। जबकि कुछ लोग अपने घरों के आसपास खाली प्लाट, मैदान व अन्य स्थानों पर टैंट लगाकर समारोह के आयोजन की तैयारी कर रहे है। पौराणिक कथाओं के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु चार माह के लिए शयन के लिए चले जाते है। इसके बाद वह कार्तिक एकादशी को शयन निद्रा से जागते हैं। जिसके बाद ही सहालग व अन्य शुभ कार्यों की शुरूआत हो जाती है। 

सभी बैंक्वेट हाल व होटल बुक

क्षेत्र में करीब दो दर्जन छोटे बड़े बैंक्वेट हाल है। जो सभी बुक है। इसके अलावा भी लोगों ने कई होटलों को समारोह के लिए बुक कर लिया है। 

सजने संवरने का भी उत्साह

शादी समारोह में खूबसूरत दिखने की चाहत ने कास्मेटिक बाजार की रंगत को निखार दिया। महिलाएं व लड़कियां कास्मेटिक, ज्वैलरी की जमकर खरीदारी कर रही हैं। ऐसे में ब्यूटी पार्लर पर भी बुङ्क्षकग हाउसफुल है। नई नई धुनों के साथ बैंडबाजे तैयार

देवोत्थान के साथ शुरू होने वाले सहालग के लिए बैंडबाजे वालों ने नए फिल्मी गानों को तैयार किया है, ताकि नई धुनों पर वह बरातियों को जमकर नचा सकें। 

होगा तुलसी सालिग्राम का विवाह

देवात्थान एकादशी पर जहां एक ओर देव जाएंगे, तो वही दूसरी ओर घरों में तुलसी सालिग्राम विवाह का भी आयोजन होगा। इसके लिए गन्ना, ङ्क्षसघाड़ा और शकरकंदी की खरीद लोग करते है। 

ये दिन हैं शुभ

देवोत्थान एकादशी का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। श्रीहरि विष्णु आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु चार माह के लिए शयन के लिए चले जाते है और इसके बाद वह कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवोत्थान एकादशी को शयन निद्रा से जागते हैं। जिसके बाद सभी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश समेत अन्य कार्य शुरू हो जाते है। यह जानकारी ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के पंडित चंद्रशेखर शर्मा ने दी। उन्होंने कहा कि नवंबर माह में ग्यारह दिन व दिसबंर माह के पहले पाक्षिक में एक, पांच, छह, ग्यारह व 12 तारीख शुभ है। पंडित चंद्रशेखर शर्मा ने बताया शास्त्रों में उल्लेख है कि जब ऋषि भागीरथ पृथ्वी पर गंगाजी को लेकर आये थे तब कहा गया था कि गंगा स्नान से सारे पाप नष्ट हो जाएंगे। साथ ही यह भी यह भी उल्लेख है कि बिना एकादशी व्रत के मुक्ति संभव नहीं है। इसलिए एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। 

Posted By: Narendra Kumar

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