रामपुर (मुस्लेमीन)। नवाब खानदान की संपत्ति के बंटवारे की प्रक्रिया इन दिनों चल रही है। नवाब खानदान की संपत्ति 1073 एकड़ में फैली है। कोठी खासबाग का इलाका ही इतना बड़ा है कि इसमें एक और शहर बस सकता है। इस अकेली कोठी का एरिया 450 एकड़ है और सिविल लाइंस क्षेत्र में है। नवाब खानदान की अरबों रुपये की संपत्ति में 16 हिस्सेदार हैं,  जिनमें कुछ विदेश में रह रहे हैं। 

आखिरी नवाब थे रजा अली खां

रामपुर में 1774 से 1949 तक नवाबों का राज रहा। नवाब रजा अली खां आखिरी नवाब थे। इस खानदान की संपत्ति का अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बंटवारा हो रहा है। नवाब खानदान की संपत्ति में अकेली कोठी खास बाग ही 450 एकड़ में है। इसके अंदर ढाई सौ कमरे, सिनेमाघर और शस्त्रागार भी है। कई हथियार तो सोने और रत्न जडि़त हैं। एक बंदूक आठ फीट लंबी है, जिससे दो हजार छर्रे एक साथ निकलते थे। इसी कोठी में बंकर से भी मजबूत स्ट्रांग रूम भी है, जिसमें शाही खजाना रहता था। इसके अलावा शाहबाद में लक्खी बाग, बेनजीर बाग और नवाब रेलवे स्टेशन आदि शामिल हैं। पूरी संपत्ति में 16 हिस्सेदार हैं। इन हिस्सेदारों में नवाब रजा अली खां के तीन बेटे और पांच बेटियों के परिवार शामिल हैैं। तीनों बेटों और एक बेटी की मौत हो चुकी है।

 

ये हैैं 16 हिस्सेदार

नवाब रजा अली खान के सबसे बड़े बेटे स्व. नवाब मुर्तजा अली खां के बेटे मुहम्मद अली खां उर्फ मुराद मियां और बेटी निखत आब्दी। दूसरे बेटे स्व. नवाब जुल्फिकार अली खां उर्फ मिक्की मियां की पत्नी पूर्व सांसद बेगम नूरबानो, बेटे पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां, बेटी समन और सबा शामिल हैं। सबा भारत के पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के बेटे दुर्रेज अहमद की पत्नी हैं। दुर्रेज अहमद जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हैं। तीसरे बेटे स्व. आबिद अली खान की पत्नी गिसेला लेस्चबोर उर्फ गिसेला मारिया अली खान, इनके पुत्र रजा लेस्चबोर व नदीम लेस्चबोर उर्फ सैयद नदीम अली खान। ये सभी जर्मनी में रहते हैं। नवाब की पांच बेटियों में सैयदा ब्रिजीश लका बेगम (दिल्ली), स्व.सैयदा अख्तर लका बेगम (लखनऊ), सैयदा नाहिद लका बेगम (दिल्ली), सैयदा कमर लका बेगम (कोलकाता) व मेहरुनिशा बेगम हैैं। स्व. अख्तर लका बेगम के बेटे सिराजुल हसन व तलत फात्मा हिस्सेदार हैं। मेहरुनिशा बेगम पाकिस्तान के पूर्व एयर चीफ मार्शल स्व. अब्दुल रहीम खान की पत्नी हैं, जो अब अमेरिका में रहती हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले सारी संपत्ति पर स्व. नवाब मुर्तजा अली खां के बेटे मुराद मियां व बेटी निखत आब्दी ही काबिज थे। 

 

1972 में दर्ज किया था मुकदमा

राज परंपरा के मुताबिक बड़ा बेटा ही नवाब की सारी संपत्ति का हकदार होता था। नवाबी खत्म होने पर खानदान के दूसरे सदस्यों ने बंटवारा राज परंपरा के बजाय शरीयत के हिसाब से करने की मांग करते हुए 1972 में कोर्ट में मुकदमा दायर किया। पांच माह पहले सुप्रीम कोर्ट ने शरीयत के हिसाब से ही बंटवारा करने के आदेश दिए। नवाब रजा अली खां के तीन बेटे और पांच बेटियों में अब संपत्ति बांटी जा रही है। 

आज फिर खुलेगा नवाब खानदान के हथियारों का जखीरा

कोठीखास बाग में सोमवार को फिर नवाब खानदार के हथियारों का जखीरा खोला जाएगा। एडवोकेट कमिश्नर और अधिकारियों की मौजूदगी में हथियारों की गिनती कराई जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नवाब खानदान की संपत्ति का बंटवारा किया जा रहा है। इसके लिए जिला जज को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला जज ने नवाबों की संपत्ति के सर्वे व मूल्यांकन के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किए हैं, जो संपत्ति का मूल्यांकन कराने के लिए सर्वे कर रहे हैं। पिछले दिनों कोठीखास बाग में रखे नवाबों के हथियारों की आरमरी खोली गई थी। यहां बंदकूें, पिस्टल, रायफल, रिवाल्वर, तलवारें आदि हजारों की संख्या में रखी हैं। 

Posted By: Narendra Kumar

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