मुरादाबाद, जेएनएन। जनपद में डेंगू का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। रोजाना शहर के अस्पतालों में दर्जनों मरीज पहुंच रहे हैं लेकिन, स्वास्थ्य विभाग अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए डेंगू के आंकड़ों मेें ही खेल कर रहा है। जिला अस्पताल की पैथलैब में डेंगू आशंकित मरीजों के खून की जांच की जा रही है। डेंगू है या नहीं इसकी रिपोर्ट भी अब नहीं बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की मनमानी की वजह से निजी अस्पताल पुष्टि करने के बजाय इलाज पर जोर दे रहे हैं। 

संचारी रोग अभियान के नाम पर जिले के 584 गांव में एंटी लार्वा छिड़काव और फागिंग की व्यवस्था कराई गई थी। संचारी रोग अभियान में भी खानापूर्ति ही की गई। अधिकतर गांव में बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी हुई है। निजी अस्पतालों में दो से चार मरीज गंभीर हालत में पहुंच रहे हैं। हालात ये हैं कि डेंगू होने पर उन लोगों को अधिक खतरा हो रहा है जिनके प्लेटलेट्स 10 हजार तक पहुंच रहे हैं। उनकी किडनी और हृदय पर भी इसका असर पड़ रहा है। इससे और भी गंभीर स्थिति तब देखने को मिल रही है जब मरीज के प्लेटलेट्स 10 हजार से कम पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी निजी डॉक्टरों पर दबाव बना रहे हैं कि डेंगू की पुष्टि सिर्फ सरकारी अस्पताल की लैब से होगी। डेंगू के प्रति स्वास्थ्य विभाग का रवैया देखकर ऐसा लग रहा है कि अधिकारी अब कुछ करने के बजाय सिर्फ ठंड का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि जाड़े में डेंगू का प्रकोप खत्म हो जाता है।

रतनपुर कलां में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डाला डेरा

पाकबड़ा के रतनपुर कलां में एक रात में बुखार से ताहिर हुसैन, साबिर हुसैन और लाल मुहम्मद की मौत हो जाने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में डेरा डाल दिया। लोगों के खून की जांच के लिए स्लाइड बनाई गई और दवा का वितरण भी किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनिता अग्निहोत्री भी गांव में पहुंचीं और लोगों से बुखार के बारे में जानकारी की गई। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ से भी बात की। शिविर में आए बुखार के रोगियों से भी जानकारी की। दूसरे दिन शिविर लगाया गया।

Posted By: Narendra Kumar

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