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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 27, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रंगमंच का समृद्ध इतिहास संभाले है मुरादाबाद

By JagranEdited By:
Published: Wed, 27 Mar 2019 04:05 PM (IST)

मुरादाबाद में भी रंगमंच का एक समृद्ध इतिहास है।

रंगमंच का समृद्ध इतिहास संभाले है मुरादाबाद
रंगमंच का समृद्ध इतिहास संभाले है मुरादाबाद

मुरादाबाद । मुरादाबाद में भी रंगमंच का एक समृद्ध इतिहास है। यहां के कलाकारों ने न सिर्फ मुरादाबाद में खुद का नाम किया बल्कि पूरे देश में भी पीतल नगरी की छाप छोड़ी है। आज रंगमंच दिवस पर इस पीतल नगरी के रंगमंच के इतिहास को खंगाला जाए तो इसमें पारसी रंगमंच का सूरज मास्टर फिदा हुसैन नरसी चकमता हुआ मिलेगा। इसके अलावा इस नगरी के कई ऐसे छोटे सितारे भी रहे जो मुरादाबाद से निकल कर रंगमंच के फलक पर छा गए।

मुरादाबाद के रंगमंच की बात आए और मास्टर फिदा हुसैन नरसी का नाम जरूर लिया जाता है। उन्होंने पारसी रंगमंच को नई ऊर्जा तो दी ही साथ ही मुरादाबाद की धरती पर रंगमंच कर्मियों की फौज भी खड़ी कर दी। जिसके बाद मुरादाबाद में रंगमंच की दुनिया फूली फली। हालांकि वर्तमान समय मुरादाबाद के रंगमंच के लिए भले ही अच्छा न हो, लेकिन फिदा हुसैन नरसी के समय में पीतल नगरी में रंगमंच काफी सक्रिय रहा।

रंगमंच से जुड़ाव के कारण छोड़ा था घर

1899 में मुरादाबाद के एक मुस्लिम परिवार में पैदा हुए फिदा हुसैन 19 साल की उम्र में घर से भाग कर दिल्ली चले गए। यहीं से पारसी रंगमंच को एक नया सितारा मिल गया। उन्होंने अपना पहला किरदार एक महिला का निभाया। 1930 से पारसी सिनेमा में सक्रीय हुए फिदा हुसैन नरसी ने करीब तीस साल तक इसमें काम किया। वे कलकत्ता के मूनलाइट थियेटर में भी सक्रिय रहे और 1868 में इससे रिटायर हो गए। इसके बाद 1990 से वे नैशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एक्टिंग और डायरेक्शन दिवस के सेमिनार करते रहे और 1999 में में वे दुनिया से विदा हो गए।

कई संस्थाओं ने जिंदा रखा रंगमंच

मुरादाबाद में रंगमंच की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाते हुए आदर्श कला संगम का गठन 1969 में किया गया। इसके संस्थापक सदस्यों में प्रो. महेंद्र प्रताप, बलवीर पाठक व डॉ. प्रदीप शर्मा शामिल थे। इसके अलावा रंगमंच से जुड़े और ओम अभिनय कला संस्थान के अध्यक्ष ओम प्रकाश ओम बताते हैं कि शुरुआती दिनों में कई संस्थाएं भी बनीं जो मुरादाबाद के रंगमंच को आगे बढ़ाती रहीं। उस समय प्रयास नाट्य संस्था, आस्था नाट्य संस्था, कार्तिकेय जैसी संस्थाओं ने कला की इस विधा को जिंदा रखने का काम किया। जिसमें टीवी कलाकार मदन कबीर, सुधाकर रंजन त्यागी, धन सिंह धनेंद्र, विपिन जैनी, राजीव सारस्वत जैसे लोग सक्रीय रहे।