रामपुर। सांसद आजम खां के बेटे अब्दुल्ला के खिलाफ जारी वारंट को तामील कराने में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। इसे लेकर अदालत ने नाराजगी जाहिर की और दोबारा गैर जमानती वारंट जारी करते हुए तामील कराने के आदेश दिए हैं। 

यह है पूरा मामला 

मामला लोकसभा चुनाव के दौरान का है। आजम पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे। तब उनके बेटे अब्दुल्ला ने चुनाव प्रचार के लिए आयोजित जनसभा में अली और बजरंग बली को लेकर बयान दिया था। इसे आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए सिविल लाइंस कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस ने अब्दुल्ला के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। सुनवाई अपर जिला जज षष्टम के न्यायालय में चल रही है। अदालत ने उन्हें कई बार समन जारी किए, लेकिन वह कोर्ट नहीं पहुंचे। इस पर न्यायालय ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किए थे। बुधवार को मुकदमे की सुनवाई हुई। अदालत ने जब वारंट के बारे में जानकारी की तो पता चला कि पुलिस अभी तक वारंट अब्दुल्ला को तामली नहीं करा सकी है। इसे पुलिस की लापरवाही मानते हुए अदालत ने नाराजगी जताई। 

सात को दोबारा होगी सुनवाई 

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राम औतार ङ्क्षसह सैनी ने बताया कि अदालत ने दोबारा जमानती वारंट जारी 

किए हैं। अदालत अब इस मामले में सात फरवरी को सुनवाई करेगी। 

सांसद आजम खां की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

सपा के वरिष्ठ नेता सांसद मो. आजम खां की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मौलाना जौहर ट्रस्ट लखनऊ, मो. अली जौहर विश्वविद्यालय रामपुर के नाम से करोड़ों के सरकारी धन व भूमि घोटाले की सीबीआइ जांच की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर राज्य सरकार व ट्रस्ट से 29 जनवरी तक जानकारी मांगी है। आजम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं। याचिका में ट्रस्ट व विश्वविद्यालय के नाम से हड़पे गये सरकारी धन की वसूली की मांग की गयी है। याची का कहना है कि रामपुर के जिला प्राधिकारियों की जांच में घोटाले व गबन की पुष्टि के बावजूद सरकार कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। 

रामपुर के फैसल खान लाला की याचिका की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर व न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने याची से कहा कि ऐसे ही मामलों में शासन व किसानों ने एफआइआर दर्ज कराई है। उसकी विवेचना चल रही है। ऐसे में याचिका दाखिल करने का क्या औचित्य है? इस पर याची अधिवक्ता का कहना था कि धन के गबन के मामले में आपराधिक कार्यवाही में दंड दिया जा सकता है। लेकिन, सरकारी नुकसान की भरपाई नही की जा सकती, इसलिए याचिका में सरकारी धन की वसूली की मांग की गयी है। याचिका में सरकारी धन के गबन की वसूली सपा सांसद कुलाधिपति मो. आजम खां सहित ट्रस्ट व विश्वविद्यालय से कराने के लिए सीबीआइ जांच की मांग की गयी है। 

 

Posted By: Narendra Kumar

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