मुरादाबाद(रितेश द्विवेदी)। मंदी के शोर को रोकने के लिए भारत सरकार विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रही है। इसी उद्देश्य को लेकर केंद्र सरकार भारत के अलग-अलग राज्यों के प्रमुख शहरों में प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन करा रही है। सरकार ने भारत में निवेश को बढ़ावा देने के लिए पूर्व में भी कई कदम उठाए थे। दैनिक जागरण ने आरटीआइ के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय से प्रवासी भारतीय सम्मेलन के बारे में कुछ सवाल पूछे थे, जिसमें विदेश से आने वाले निवेशक और निवेश के संबंध में जानकारी मांगी थी। सरकार ने आरटीआइ में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए निवेशकों का नाम बताने से इन्कार कर दिया लेकिन, भारत में आयोजित हुए प्रवासी भारतीय सम्मेलन में कितना बजट खर्च हुआ इसकी जानकारी जरूर दी है। आरटीआइ में मिले जवाब के अनुसार देश के दो शहरों में प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन कराया गया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि वाराणसी में जनवरी 2019 में आयोजित हुए तीन दिवसीय प्रवासी भारतीय सम्मेलन के लिए केंद्र सरकार ने 26 करोड़ 17 लाख 85 हजार रुपये की धनराशि खर्च की है। जबकि राज्य सरकार के एनआरआइ विभाग के मुताबिक इस आयोजन में राज्य सरकार के अनुदान के साथ कुल 50 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की गई है।

सम्मेलन खत्म होने के बाद विदेश गए अधिकारी

-बीते तीन सालों में केंद्र सरकार के सहयोग से दो बड़े प्रवासी भारतीय सम्मेलन में साल 2017 में बेंगलुरु और जनवरी 2019 में वाराणसी में प्रवासी सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रवासी भारतीय सम्मेलन का प्रचार-प्रसार करने के लिए अधिकारी चार माह बाद विदेश यात्रा में गए थे। विदेश मंत्रालय के तत्कालीन सचिव डॉ.मनोज कुमार महापात्रा ने 15 से 20 जुलाई तक अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को,शिकागो के साथ ही न्यूयार्क की यात्रा की थी। उनकी इस यात्रा में 14 लाख 13 हजार 337 रुपये का बजट खर्च हुआ लेकिन, सम्मेलन खत्म होने के बाद विदेश यात्रा का क्या मतलब है। यह बात अभी तक समझ में भी नहीं आ रही है।

घोटाले का भी लगा दाग

-प्रवासी भारतीय सम्मेलन में हुए खर्च को लेकर दो माह पहले उत्तर प्रदेश में एनआरआइ विभाग के प्रमुख सचिव राजेश सिंह ने भी सवाल खड़े करते हुए वित्त विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखा था। इस मामले की जांच शासन स्तर पर अभी भी चल रही है।

 

Posted By: Narendra Kumar

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