सम्भल, जेएनएन। दशकों पुरानी संभल गजरौला रेल लाइन की मांग का इंतजार और लंबा हो गया। इस शहर में अभी भी अंग्रेजों द्वारा बिछाई गई रेल लाइन ही है। किसी और रेल लाइन का अब तक निर्माण नहीं हो सका है। 

देश आजाद होने के 71 साल बाद भी इस शहर को नई रेलवे लाइन नसीब नहीं हुई। काफी वर्षों से शहर के लोग सम्भल-गजरौला रेलवे लाइन की मांग कर रहे हैं। शहर को इस बजट से लाइन मिलने की उम्मीद थी लेकिन, उम्मीद फिर से उम्मीद बनकर ही रह गई। सम्भल से गजरौला रेल लाइन का जिक्र आते ही आमजन के चेहरे खिल जाते है। उन्हें लगता है कि इस रूट पर ट्रेन दौडऩे से यातायात सुलभ हो जाएगा, इसकी सख्त दरकार भी है। कई दशक पुरानी यह मांग रेल मंत्रालय पहुंची तो सर्वे कराया गया और सात साल पहले रेल बजट में शामिल कर हरी झंडी दे दी गई।

लोगों को बजट से बहुत उम्मीदें थी, लेकिन आज के बजट से शहर के लोगों को एक बार फिर मायूसी हाथ लगी। यहां पर सींग, मेंथा के कारोबार को तरक्की के पंख लगे। गजरौला से सम्भल लाइन जुडऩे से कई गांवों के लोगों को रेल सुविधा देने में सफल हो जाएगा। हसनपुर, सैदनगली, उझारी, गजरौला इत्यादि क्षेत्रों के लोगों ने इसकी मांग उठाई और आगे पहुंचाई तो रेल मंत्रालय ने इसे भविष्य के लिए अच्छा कदम मानते हुए इसका सर्वे भी करा डाला। 

इस रूट के सहारे शहर के लोगों को दिल्ली जाने में आसानी होगी। केंद्र सरकार के आम बजट का के साथ रेल बजट के आने से शहरवासियों को काफी उम्मीदे थी। रेलवे के इस बार आई आम बजट में कुछ नही मिला। किराया घटाने बढ़ाने के बीच यह उम्मीद भी की जा रही है कि शायद इस रेल लाइन को अमली जामा पहनाने के लिए इस बजट से कुछ नया हो जाए, उन लोगों के प्रयास सफल हो जाए, जो इस वाजिब मांग को लेकर चले और पूरी होने के इंतजार में आस लगाए बैठे हैं। 

निर्यातक पिछले कई वर्षाें से शहर वासियों की मांग चली आ रही हैं। सांसद को बजट आने के बाद भी रेलमंत्री से बात करनी चाहिए थी। ताकि जल्दी उस पर अमल हो सके। जनता भी इसके इंतजार में है। इससे व्यापार को भी मजबूती मिलेगी। इस बार फिर लोगो को मायूसी हाथ लगी हैं।

सुहैल परवेज, निर्यातक

सम्भल गजरौला रेल लाइन बनने से व्यापार की राह आसान हो जाएगी। अभी सड़क से आवागमन होता है, जो बहुत असुविधा वाला है। रोडवेज बसों का आवागमन कम होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लाइन बनने से लोगों के व्यापार को पंख लगेंगे। रेल विभाग की आय भी बढ़ेगी।

शकील सैफी, निर्यातक

 पार्टी पूर्व सरकार की सरकारों व सांसदों की ढिलाई के कारण ही जनता की रेल से जुड़ी समस्याएं दूर नहीं हो पाती। शहर के लोगो की सालों पुरानी मांग प्रति गंभीरता दिखानी चाहिए थी। रेल मंत्री को आय बढ़ाने के मामले अवगत कराते तो सालों पुरानी मांग पूरी हो सकती थी।

सैय्यद असलम, समाजसेवी

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