मुरादाबाद (जेएनएन) : जिला पंचायत की सियासत में मंगलवार को विराम लग गया। भाजपा की मिथलेश रानी का एकमात्र नामांकन होने से जीत भी तय हो गई है। भाजपा के धुरंधरों की रणनीित के आगे सपा और बसपा के दिग्गज अपना प्रत्याशी भी नहीं उतार सके। मिथलेश रानी के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने की विधिवत घोषणा 25 सितंबर को होगी औ र उसी दिन जीत का प्रमाण-पत्र मिलेगा।

ऐसे चली सियासत

पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शलिता सिंह के खिलाफ 10 अगस्त को 21 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव दाखिल किया था। इसके लिए छह सितंबर को मतदान की तिथि तय की गई। पांच सितंबर को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था। घटनाक्रम को लेकर सियासत रंग बदलती रही, सदस्यों की खरीद फरोख्त और उनको अपने कब्जे में लेने को लेकर प्रदेश के पंचायती राज राज्यमंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह और सांसद सर्वेश कुमार सिंह के गुट में रस्साकशी चलती रही।

नामांकन के लिए मंगलवार का दिन तय किया था। इसको लेकर सुबह से ही कलेक्ट्रेट को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। बसपा के अलावा सपा के प्रत्याशियों का नामांकन तय माना जा रहा था। सुबह दस बजे से भाजपाइयों का कलेक्ट्रेट में जुटना शुरू हो गया। शहर विधायक रितेश गुप्ता, जिलाध्यक्ष हरिओम शर्मा, महानगर अध्यक्ष महेंद्र गुप्ता तथा जिला पंचायत सदस्य मौजूद रहे। सांसद सर्वेश कुमार, कांठ विधायक राजेश कुमार चुन्नू ने एक साथ आकर सभी को चौंका दिया। हालांकि उनका आना तय नहीं था। उनके आने के बाद घटनाक्रम बदल गया और मिथलेश रानी ने नामांकन पत्र दाखिल किया। जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने नामांकन पत्र लिया। इसके बाद दोपहर एक बजे भाजपा का काफिला कलेक्टे्रट से निकल गया।

सांसद के सिर बंधा निर्विरोध निर्वाचन का सेहरा

जिला पंचायत अध्यक्ष के निर्विरोध निर्वाचन का सेहरा आखिरकार सांसद के सिर ही बंधा। ढाई वर्ष तक सांसद के हस्तक्षेप और मर्जी के चलते जिला पंचायत का कार्यकाल सुचारू नहीं चला। दो वर्ष में दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। अब आगामी ढाई वर्ष के कार्यकाल की उम्मीद सदस्य लगाए बैठे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सांसद एवं राज्यमंत्री के बीच अदावत चली आ रही थी। पिछले अविश्वास प्रस्ताव में सांसद ने अहम भूमिका निभाकर प्रस्ताव को गिरवा दिया था। इसके बाद दोनों के बीच फिर गुटबाजी होने लगी।

मिथलेश के पति थे राज्यमंत्री के पीए

जिला पंचायत अध्यक्ष प्रत्याशी मिथलेश रानी के पति महावीर सिंह पहले पंचायती राज राज्यमंत्री के पीए थे। सांसद ने अपने प्रभाव का असर दिखाकर पंचायती राज राज्यमंत्री के पीए को हटवाकर कृषि विभाग में भिजवा दिया। इसके बाद तो दोनों के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष के पद को लेकर ठन गई, हालांकि पंचायती राज राज्यमंत्री ने कभी भी सियासत की बात नहीं की। इस घटनाक्रम के बाद अनेक सदस्य मिथलेश के समर्थन में आ गए। नेताओं में निर्विरोध निर्वाचन एवं जीत का सेहरा लेने की होड़ लगी रही। पंचायती राज राज्यमंत्री की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी थी। मंगलवार को जब नामांकन के लिए सुबह से भाजपाई वहां पहुंचे हुए थे। दोपहर 12 बजे करीब सांसद सर्वेश कुमार सिंह और कांठ विधायक राजेश कुमार चुन्नू समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट में आए। सांसद के नामांकन में रहने पर भाजपाइयों में चर्चाओं पर विराम लग गया। दोपहर बाद तक दूसरा कोई उम्मीदवार नामांकन कराने नहीं आया। इसका श्रेय सांसद को मिल गया।

पंचायती राज राज्यमंत्री के पहुंचने के बाद लिखी पटकथा

जिला पंचायत अध्यक्ष को लेकर राजनीति में धुर विरोध सांसद सर्वेश कुमार सिंह एवं पंचायती राज एवं लोक निर्माण राज्यमंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह के बीच रस्साकशी चल रही थी। रविवार को पंचायती राज मंत्री, शहर विधायक के साथ सांसद के घर रतुपुरा पहुंचे। वहां गुफ्तगूं के बाद तय माना जा रहा था कि जिला पंचायत अध्यक्ष की राह आसान हो गई।

आशीर्वाद लेकर ही घर से निकले महावीर

वार्ड दो की प्रत्याशी मिथलेश के पति महावीर सिंह बीती रात सांसद सर्वेश कुमार सिंह के आवास पर पहुंचे। आशीर्वाद लिया और संतुष्ट होकर निकले। यही नहीं कलेक्ट्रेट में नामांकन के दौरान मिलथेश ने सांसद के पैर छुए। सांसद ने भी सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। इसके बाद एक बड़ी माला जिसमें सांसद सर्वेश कुमार सिंह, कांठ विधायक राजेश कुमार चुन्नू, शहर विधायक रितेश गुप्ता, जिलाध्यक्ष हरिओम शर्मा, रामवीर सिंह के गले में डाली गई, जिसमें संदेश दिया गया कि हम साथ-साथ हैं।

विकास के पटरी पर आने की उम्मीद

सांसद सर्वेश सिहं का कहना है कि ढाई वर्ष से विकास कार्य नहीं हो रहे थे। सियासत चल रही थी। पहले हमने चाहा तो शलिता सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। अब हमने चाहा है तो अब मिथलेश रानी निर्विरोध निर्वाचित हुईं हैं। उनके पति बीती रात घर आए थे। सुबह प्रत्याशी ने आशीर्वाद लिया। हमने दोनों का आशीर्वाद दे दिया। अब जिले का विकास पटरी पर आने की उम्मीद है।

सांसद के साथ बनाई रणनीति

पंचायती राज एवं लोक निर्माण के राज्यमंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह का कहना है कि सांसद पार्टी के संरक्षक हैं। उन्होंने चाहा वही हुआ। उनकी मर्जी के मुताबिक ही जिला पंचायत का निर्विरोध निर्वाचन हो सका। उनकी आशीर्वाद के लिए कोई भी जा सकता है। बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने की हमारी परंपरा है। रविवार को काशीपुर से अपने काम से लौट रहा था। ठाकुरद्वारा लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन में सांसद से चर्चा हुई थी। बाद में सांसद अपने घर ले गए। उनसे चर्चा हुई और जिला पंचायत का निर्विरोध तय हो सका।

छठी महिला जिपं. अध्यक्ष होंगी मिथलेश

जिला पंचायत अध्यक्ष के पद के लिए किसी अन्य का नामांकन पत्र दाखिल न किए जाने से भाजपा की मिथलेश कुमारी का जिला पंचायत अध्यक्ष बनना तय है। वह जिला पंचायत की 11 वीं एवं महिलाओं में छठी अध्यक्ष होंगी। सपा के दौर-ए-हुकूमत में शलिता सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में दसवीं एवं महिला के रूप में पांचवीं अध्यक्ष चुनी गईं। जिला पंचायत का गठन होने के बाद शरीयतुल्ला 24 जनवरी 1989 से 22 मई, 1995 तक प्रथम अध्यक्ष रहे। 22 मई, 1995 से 27 जून 2000 तक कुसुमलता यादव, 28 जून, 2000 से 28 अगस्त 2000 तक एसके गुप्ता प्रशासक, नौ अगस्त, 2000 से नौ अक्टूबर, 2005 तक फिजाउल्ला चौधरी, दस अक्टूबर, 2005 से 13 जनवरी 2006 तक उमाधर द्विवेदी प्रशासक, 14 जनवरी, 2006 से 13 जनवरी 2011 तक कुसुमलता यादव, 14 जनवरी, 2011 से तीन दिसंबर 2012 तक गुलनाज अकबर, छह दिसंबर 2012 से 24 जनवरी 2013 संजय कुमार प्रशासक, 24 जनवरी 2013 से 13 जनवरी 2016 तक मंजू देवी व 14 जनवरी, 2016 से पांच सितंबर 2018 तक शलिता सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं।

कुर्सी बचाने में लगा रहा जिपं. का अमला 

जिला पंचायत सदस्य विश्वास यादव का प्रमाण पत्र न मिलने से जिला पंचायत कार्यालय कर्मचारियों के होश उड़ गए। दिनभर तलाश करने के बावजूद प्रमाण पत्र नहीं मिला। पंचास्थानि कार्यालय में तलाश कराने के बावजूद मायूसी हाथ लगी। कुर्सी बचाने के लिए अधिकारियों ने कर्मचारियों के पेंच कसे।

मंगलवार को जिला पंचायत अध्यक्ष पद की उम्मीदवार मिथलेश कुमारी का नामांकन पत्र दाखिल किया जाना था। प्रस्तावक के रूप में विश्ववास यादव उर्फ बबली का नाम तय होने पर उनके प्रमाण पत्र की आवश्यकता हुई। पता चला कि उप चुनाव जीतने के बाद बबली अपना प्रमाण पत्र लेकर नहीं गए हैं जो जिला पंचायत कार्यालय में मौजूद है। कुछ देर में ही प्रमाण पत्र पहुंचाने का फरमान जिपं. कार्यालय में पहुंच गया। जिसे सुनकर कर्मचारी तलाश में जुट गए। अधिकारियों के भी होश उड़ गए। घंटों तलाशने के बावजूद प्रमाण पत्र नहीं मिला। सभी को कुर्सी बचाने की चिंता सताने लगी। अधिकारियों ने संबंधित बाबू के पेंच कसे। दफ्तर की अलमारियों को खंगाला गया, लेकिन मायूसी के सिवा कुछ नहीं मिला। संबंधित कर्मचारी को निलंबन की चेतावनी दी गई।

 

Posted By: Rashid

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