बिजनौर कलेक्टर का सरकारी आवास कुर्क करने का आदेश, आठ साल से लंबित डिक्री का भुगतान न करना पड़ा भारी
मुरादाबाद के भूमि अर्जन प्राधिकरण ने बिजनौर कलेक्टर के सरकारी आवास को कुर्क करने का आदेश दिया है। यह आदेश ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
बिजनौर कलेक्टर का सरकारी आवास कुर्क करने का आदेश।
आठ साल से लंबित डिक्री की धनराशि जमा नहीं की।
उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना पर हुई कार्रवाई।
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण ने आठ साल से लंबित निष्पादन वाद में कलेक्टर बिजनौर के सरकारी आवास कुर्क करने के आदेश दिए हैं।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के बावजूद डिक्री की धनराशि जमा न करना उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में डिक्रीदार पक्ष के अधिवक्ता उपस्थित रहे, जबकि राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता भी मौजूद रहे।
राज्य पक्ष की ओर से प्रस्तुत स्थगन प्रार्थना पत्र में बताया गया कि नीलामी प्रक्रिया विचाराधीन है। संबंधित मामलों में अपील, रिट तथा पुनर्विचार याचिकाएं लंबित हैं। 19 मार्च को प्रस्तावित नीलामी में कोई बोलीदाता उपस्थित नहीं हुआ, जिसके कारण अब नई तिथि 30 मार्च तय की गई है।
वहीं डिक्रीदार पक्ष ने स्थगन का विरोध करते हुए कहा कि नीलामी के दिन अधिकारी कुछ मिनट के लिए स्थल पर पहुंचे और फिर चले गए। उनका पक्षकार शाम चार बजे तक मौके पर मौजूद रहा, लेकिन नीलामी नहीं हुई। इस संबंध में फोटोग्राफ भी उपलब्ध कराने की बात कही गई।
न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन कर कहा कि उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिए हैं कि वाद छह माह में निस्तारित किए जाएं, जबकि यह मामला करीब आठ वर्षों से लंबित है। इसके अलावा इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी 2020 में आदेश देकर एक वर्ष के भीतर वाद के निस्तारण के निर्देश दिए थे, जिसका पालन अब तक नहीं किया गया।
न्यायालय ने कहा कि पूर्व में भी अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया गया था कि पूरी धनराशि ब्याज सहित जमा की जाए, लेकिन आदेश का पालन नहीं हुआ। इस पर न्यायालय ने संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही उच्च न्यायालय को भेजी जाए।
यह भी पढ़ें- मुरादाबाद से गिरफ्तार किए गए हारिस अली को रिमांड पर लेगा ATS, करना चाहता था बड़ी आतंकी वारदात
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पूर्व में संलग्न संपत्ति से धनराशि की वसूली नहीं हो पा रही है, जिसका कारण नीलामी प्रक्रिया में शिथिलता माना गया। न्यायालय ने इसे गंभीर मानते हुए कहा कि इससे उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के पालन में बाधा उत्पन्न हो रही है।
परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने आदेश दिया कि कलक्टर बिजनौर के सरकारी आवास को कुर्क किया जाए। उक्त संपत्ति को न तो हस्तांतरित किया जाएगा और न ही उससे किसी प्रकार का आर्थिक लाभ लिया जाएगा। हालांकि कलेक्टर अपने पद के तहत आवास का उपयोग करते रहेंगे। न्यायालय ने कलक्टर बिजनौर को निर्देशित किया है कि वे 30 मार्च को न्यायालय में उपस्थित होकर संपत्ति के विक्रय संबंधी शर्तों के निर्धारण में भाग लें।
