मुरादाबाद, जेएनएन। ठाकुरद्वारा में बाल दिवस पर बच्चे की पिटाई का मामला गूंजने लगा है। हरकत में आए शिक्षा विभाग ने स्कूल को बंद करा दिया। इसके साथ ही शिक्षण कार्य संबंधी रिकार्ड भी जब्त कर लिया है। नई बस्ती में मोहम्मद इस्लाम की बेटियां इकरा एकेडमी के नाम से संस्था चला रही थीं। 

यह है छात्र की पिटाई का मामला

बुधवार को शिक्षिका रूबीना पर एलकेजी स्टूडेंट फैसल के पिता अब्दुल सलाम ने बेदर्दी से पिटाई का आरोप लगाकर थाने में तहरीर दी थी। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण के बाद रूबीना के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने रूबीना को शांति भंग की आशंका में गिरफ्तार कर लिया था जिन्हें एसडीएम कोर्ट से जमानत मिल गई। 

विभागीय टीम ने स्कूल में की जांच 

एबीआरसी अरुण कुमार, एनपीआरसी जितेंद्र सिंह स्कूल पहुंचे। उन्होंने बच्चों के उपस्थिति रजिस्टर समेत अन्य सामग्री लेकर शिक्षण कार्य को बंद करा दिया। मान्यता की प्रति मांगने पर प्रिंसिपल रूबीना ने अल्पसंख्यक विभाग में आवेदन की प्रमाणित छाया प्रति दिखाई। कहा कि पढ़ लिखकर नौकरी नहीं मिली तो सभी बहनें गुजर बसर के लिए मिलकर बच्चों को पढ़ाती हैं। टीम ने जांच आख्या बीएसए कार्यालय को भेज दी है। 

जांच से उजागर शिक्षा की हकीकत 

नगर की पिछड़ी बस्ती पर मजदूर मोहम्मद इस्लाम के चार जवान ग्रेजुएट बेटियां हैं। घर के तीन कमरों में एक पर लेंटर पड़ा है, बाकी दो कमरों की छत पर लकडिय़ों की तख्तियां बिछकर बारिश की रोकथाम को पिन्नी और मिट्टी डाली गई है। बरांडा भी तख्तियों से पटा है। आंगन में मिट्टी के चूल्हे पर खिचड़ी उबल रही थी, लैटरीन बाथरूम की ड्योढी पर पुराने कपड़ों का पर्दा लटका दिखा।

झोपड़ीनुमा भवन में चल रहा स्कूल

यह सिर्फ झोपड़ पट्टी नहीं, बल्कि तरक्कीयाफ्ता मुल्क की पाठशाला इकरा एकेडमी है, जो कि बाल दिवस पर एलकेजी के बच्चे की पिटाई के बाद सुर्खियों में आई। विभाग की जांच में शिक्षा की बुनियादी हकीकत उजागर होती नजर आई। घरनुमा स्कूल में पढऩे वाले बच्चे ही नहीं, पढ़ाने वाली बहनों के बयान व्यवस्था को झकझोरते दिखाई दिए। कल की घटना के बाद शिक्षक बहनों ने अभिभावकों की मीटिंग बुलाई थी, जोकि अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए हरसंभव मदद के लिए तैयार थे। तीन कमरों में ब्लैकबोर्ड के साथ ग्लोब, भारत का नक्शा और दीगर शिक्षा से जुड़ी सामग्री करीने से लगी थी।

सुबह को स्कूल बनता शाम को घर

दो माता-पिता, चार बहन और दो भाई घर में रहने के साथ पढ़ाई किस तरह कर लेते हैं। इस सवाल का जवाब मिला कि रात को कमरों को सोने के लिए इस्तेमाल कर लिया जाता है, सुबह दिन निकलने से पहले सारा सामान एक कमरे में भर दिया जाता है। पिछड़ी बस्ती है और रोजाना सौ से 150 बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। दिनभर चारों बहने पढ़ाई के साथ बच्चों पढ़ाती है। उनकी तालीम पाए बच्चे कांवेंट स्कूल से मुकाबला कर सकते हैं। लाडलों की शिक्षा से खुश होकर अभिभावक जो दान दक्षिणा दे देते हैं, वही परिवार की गुजर बसर कर जरिया है। इतनी आमद भी नहीं हो पाती कि घर में गैस सिलेंडर का इंतजाम हो जाए, लिहाजा मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनता है।

अभिभावक हैं पढ़ाई से संतुष्ट

उनका हर जवाब शिक्षा विभाग से लेकर सरकारी निजाम पर सवालिया निशान लगाता दिखाई दिया। नगर में नौ सरकारी स्कूल और दर्जनों मान्यता प्राप्त संस्थाएं होने के बावजूद अभिभावक झोपड़ी पट्टी में बने स्कूल में खुशी से भेजते हैं, हम किसी को जबरन बुलाने नहीं जाते हैं। बच्चों ने बताया कि पिता मजदूरी करते थे, पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे तो हमने को पढ़ाकर खुद भी तालीम हासिल की और परिवार का भी गुजर बसर किया। आज उनके कच्चे घर में जितने बच्चे शिक्षा ग्रहण करते मिले, उतने किसी सरकारी स्कूल में पंजीकृत नहीं है। यह शिक्षा विभाग से लेकर प्रशिक्षित अध्यापकों की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

सरकारी स्कूलों में सुधार की जरूरत

शिक्षा विभाग प्रति शिक्षक चालीस हजार वेतन, मिडडे-मील और यूनीफार्म मुफ्त दे रहा हो, वहां आखिर अभिभावक बच्चों को सौ-पचास रुपये उलटे फीस देकर क्यों भेजने के लिए मजबूर हैं। एक बच्चे की पिटाई से इकरा एकेडमी तो सुर्खियों में आ गई और शिक्षा विभाग की भी नींद टूट गई, वर्ना नगर से लेकर गांवों में बेशुमार नौनिहाल मौत के साए तालीम हासिल करने के लिए मजबूर हैं। गौरतलब है कि सोमवार को जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने रामूवाला गनेश में प्राइमरी स्कूल का निरीक्षण किया तो दो सरकारी अध्यापक और दो शिक्षा मित्रों की तैनाती वाले स्कूल में 27 बच्चे पंजीकृत मिले और 13 बच्चे उपस्थित मिले थे।

Posted By: Rashid