मुरादाबाद : बावरिया गिरोह पूजा-पाठ के बाद दहशत फैलाने के लिए निकलता है। गिरोह के सदस्य माथे पर तिलक लगाने के बाद लूटपाट करते हैं। बावरिया एक घुमंतू जनजाति है, वे शहर से बाहर सड़क के किनारे डेरा डालकर रहते हैं। ये स्वभाव से ही क्रूर माने जाते हैं, जहा भी लूट करते हैं वहा बहुत मारपीट करते हैं, हत्या करने से भी पीछे नहीं हटते हैं। पाकबड़ा में हुई थी डकैती पाकबड़ा के पाट की मिलक में किसान हरिसिंह को इतना पीटा गया कि मौत से लड़ रहा है, जबकि बड़े बेटे राजू की अंगूठी छीनने के लिए हाथ की अंगुली ही काट ले गए। विनोद, दिनेश और बेटी ज्योति की डंडों से पिटाई की गई। इतना ही नहीं हरिसिंह की पत्नी वीरवती को भी पीटा गया। बावरिया गिरोह की दहशत सिर्फ यूपी में नहीं है। हरियाणा, राजस्थान और मध्यप्रदेश में भी ये गिरोह सक्रिय है। पुलिस की चार टीमें बनाकर बावरिया गिरोह पर लगा दी गई है। कार में सवार होकर आए और आगे निकल गए पुलिस अभी तक पूरे घटनाक्रम के पर्दाफाश को लेकर दो लाइनों पर काम कर रही है। एक लाइन स्थानीय बदमाशों को लेकर चल रही है, जबकि दूसरी लाइन बावरिया गिरोह पर है। पुलिस ने स्थानीय स्तर पर 14 संदिग्ध युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस को कुछ ऐसे क्लू भी मिले हैं, जो वारदात के पर्दाफाश में सहायक हो सकते है। दो टीमें बावरिया गिरोह पर काम कर रही है, जिनमें बुलंदशहर और नोएडा के जेवर में हुई घटनाओं को भी पढ़ा जा रहा है। सीओ हाईवे राजेश कुमार का कहना है कि पुलिस की टीमें मुस्तैदी से काम कर रही है। जानकारी मिली है कि बावरिया गिरोह के सदस्य वारदात को अंजाम देकर आगे की ओर निकल गए है, वे कार से आए थे। बकरे को मारकर, शरीर पर मलते हैं तेल बावरिया गिरोह के सदस्य रात में ही वारदात को अंजाम देते हैं। वारदात के लिए हमेशा सम संख्या यानी 2-4-6-8 की संख्या में ही निकलते हैं, पाकबड़ा में हुई घटना में बदमाशों की संख्या 14 थी। ये बड़ी वारदात पर जाने से पहले बकरे की बलि देते हैं। वो भी उस बकरे की जो खुद-ब-खुद मूर्ति की तरफ चलकर जाता है। अगर बकरा मूर्ति की तरफ नहीं जाता तो इसे अपशकुन मानते हुए वारदात का इरादा बदल देते हैं। गिरोह सिर्फ नकदी और गहने ही लूटता है। इस गिरोह को कच्छा बनियान गिरोह भी कहा जाता है। ये वारदात से पहले कपड़े उतार देते हैं और सिर्फ कच्छा बनियान पहनकर अपराध करते हैं। पूरे शरीर पर तेल मलते हैं। गिरोह की औरतें दिन में भीख मागने के बहाने टारगेट ढूंढती हैं। कोडवर्ड में करते हैं बातचीत वारदात के वक्त गिरोह के सदस्य कोड भाषा में बात करते हैं। अगर ये वारदात के वक्त एक-दूसरे से बिछड़ जाएं तो विशेष तरह की आवाजें निकालकर एक जगह पर इकट्ठा हो सकते हैं। कार में चलकर देते हैं वारदात को अंजाम पहले यह गिरोह ट्रेन और बस में सफर करता था लेकिन बताया जाता है कि अब गिरोह के कुछ सदस्यों ने अपनी गाड़ियां भी खरीद ली हैं। इस गिरोह के बारे में एक और कहानी ये है कि जब तक पूरा गिरोह अपने ठिकाने पर नहीं आ जाता तब तक महिलाएं दीया जलाकर रखती हैं।

Posted By: Jagran