रामपुर। सीआरपीएफ आतंकी हमले के मुकदमे में पुलिस लखनऊ जेल में बंद आरोपितों को कोर्ट में पेश नहीं कर सकी हालांकि, बरेली जेल में बंद तीन आरोपितों की पेशी हुई। इनकी मौजूदगी में अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस भी हुई। अब अदालत 19 जुलाई को सुनवाई करेगी।

सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर आतंकी हमले का यह मामला 31 दिसंबर 2007 की रात का है। कुछ आतंकियों ने आधी रात के बाद ग्रुप सेंटर पर हमला कर दिया था। इस हमले में सीआरपीएफ के सात जवान शहीद हो गए थे, जबकि एक रिक्शा चालक की भी जान गई थी। पुलिस ने इस हमले के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें पाक अधिकृत कश्मीर का इमरान, मुहम्मद फारूख, मुंबई गोरे गांव का फहीम अंसारी, बिहार के मधुबनी का सबाउद्दीन सबा, प्रतापगढ़ के कुंडा का कौसर खां, बरेली के बहेड़ी का गुलाब खां, मुरादाबाद के मूंढापांडे का जंग बहादुर बाबा खान और रामपुर के ही खजुरिया गांव का मुहम्मद शरीफ शामिल हैं। इन सभी को सुरक्षा के मद्देनजर लखनऊ और बरेली की जेलों में रखा गया है। आतंकियों के अधिवक्ता मुहम्मद जमीर रिजवी ने बताया कि शुक्रवार को सुनवाई के लिए बरेली जेल में बंद आरोपितों को ही पुलिस कोर्ट में पेश कर सकी। इन आरोपितों की मौजूदगी में दोनों ओर से बहस हुई। बहस के लिए आरोपितों की ओर से दिल्ली से निजी अधिवक्ता एमए खान भी आए। बहस पूरी नहीं हो सकी। अब 19 जुलाई को सुनवाई होगी। 

Posted By: Narendra Kumar

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