अमरोहा, जेएनएन। प्रसव से पूर्व पीडि़ता को संक्रमित खून चढ़ाने से मां-बेटी के एचआइवी ग्रस्त होने की खबर को जिलाधिकारी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच के लिए एड्स कंट्रोल सोसायटी को पत्र लिखा है। साथ ही सीएमओ से भी पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है।

डिडौली थानाक्षेत्र निवासी एक मजदूर ने अपनी पत्नी को चौधरपुर के नजदीक स्थित एक क्लीनिक में प्रसव के लिए भर्ती कराया था। यहां पर एक झोलाछाप ने प्रसव से दो दिन पूर्व पीडि़ता को संक्रमित खून चढ़ा दिया। दो दिन बाद ऑपरेशन के बाद उसने ब'ची को जन्म दिया। ऑपरेशन के दौरान पीडि़ता के पेट में रुई भी छोड़ दी थी। बाद में पीडि़ता की हालत बिगडऩे पर उसे अमरोहा स्थित एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। यहां दोबारा आपरेशन करके उसके पेट से रुई निकाली गई। इसके बाद जब पीडि़ता दोबारा गर्भवती हुई तो उसके खून की जांच के दौरान पता चला कि उसे एचआइवी हो गया है। इसके बाद बेटी के खून की भी जांच कराई गई जिसमें उसे भी एचआइवी पाजिटिव पाया गया। तब से यह दंपती काफी परेशान है। बदनामी के डर से इस दंपती ने कहीं शिकायत भी नहीं की थी। एक सीएचसी से पीडि़ता का इलाज चल रहा है। मगर हाल ही में उसका स्वास्थ्य अधिक खराब होने पर पति ने सीएमओ को पूरा प्रकरण बताया। इस पर सीएमओ डॉ. रमेश चंद्र शर्मा ने मामले की जांच शुरू करा दी है। गुरुवार के अंक में दैनिक जागरण ने जब इससे संबंधित खबर प्रकाशित की तो जिलाधिकारी उमेश मिश्र ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने बताया कि यह मामला गंभीर है। सीएमओ से रिपोर्ट तलब की गई है। साथ ही प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए उत्तर प्रदेश एड्स कंट्रोल सोसायटी को पत्र लिखा गया है। मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बढ़ता जा रहा एचआइवी का प्रकोप

अमरोहा : जागरूकता के अभाव में एचआइवी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। पिछले वर्ष जिले में जहां एचआइवी के कुल 48 मामले सामने आए थे वहीं इस वर्ष नौ महीने में 32 मामले सामने आ चुके हैं। जिला काउंसलर अमित शर्मा ने बताया कि जांच में एचआइवी की पुष्टि होने पर मरीज को एआरटी सेंटर मुरादाबाद रेफर किया जाता है। यहीं से उनका इलाज चलता है। बताया कि इस रोग से ग्रस्त मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो जाती है, जिससे वह बहुत जल्दी बीमार पड़ जाता है। कहा कि थोड़ी सी जागरूकता से इससे बचा जा सकता है।

यह था पूरा मामला, दैनिक जागरण ने किया था पर्दाफाश

डिडौली थानाक्षेत्र में रहने वाले मजदूर की पत्नी को चार साल पहले जब प्रसव पीड़ा हुई तो वह चौधरपुर स्थित एक झोलाछाप के क्लीनिक में भर्ती करा दिया। वहां उसे संक्रमित खून चढ़ा दिया गया। इसके दो दिन बाद झोलाछाप पति-पत्नी ने ही उसका ऑपरेशन कर दिया। बेटी ने जन्म लिया। 22 हजार रुपये लेने के बावजूद अस्पताल से उन्हें एक भी पर्चा नहीं दिया गया। घर पहुंचने पर पत्नी के पेट में दर्द शुरू हो गया। दोबारा झोलाछाप के यहां पहुंचे तो उसने इलाज से मना कर दिया। इसके बाद अमरोहा के एक नर्सिंग होम में दोबारा ऑपरेशन हुआ। तब पता चला कि पेट के अंदर रुई छूट गई थी। दोबारा ऑपरेशन करके रुई निकाली गई। दो साल बाद पत्नी फिर से गर्भवती हुई तो खून की जांच में पता चला कि वह एचआइवी संक्रमित हो गई है। इससे परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन फानन में बेटी व पति का खून जांचा गया। बेटी भी एचआइवी ग्रस्त मिली। इसके बाद से यह परिवार खौफ में जी रहा है। सीएचसी में इलाज चल रहा है। शर्म व संकोच के कारण उस समय कहीं शिकायत नहीं की। अब स्थिति बिगडऩे पर पीडि़ता के पति ने मंगलवार को सीएमओ से मिलकर आपबीती सुनाई। इस पर सीएमओ ने प्रकरण की जांच शुरू करा दी है।

सम्भल की सीमा में संचालित है क्लीनिक

सीएमओ डॉ. रमेश चंद्र शर्मा ने बताया कि एक झोलाछाप के खिलाफ संक्रमित खून चढ़ाने की शिकायत मिली है। मां-बेटी एचआइवी संक्रमित हो गई हैं। जांच शुरू करा दी है। हालांकि डिडौली थानाक्षेत्र के बार्डर पर जहां झोलाछाप से इलाज कराने की बात बताई है, वह सम्भल की सीमा में आता है। प्राथमिक जांच के बाद अग्रिम कार्रवाई के लिए रिपोर्ट सम्भल भेजी जाएगी। 

Posted By: Narendra Kumar

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