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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 30, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मुरादाबाद में गौरी शंकर मंदिर की खुदाई, गर्भगृह से मिलीं खंडित मूर्तियां... 44 साल पहले दंगों के बाद से था बंद

Published: Mon, 30 Dec 2024 10:27 PM (IST)

उत्तर प्रदेश में संभल के बाद अब मुरादाबाद के दौलत बाग स्थित गौरी शंकर मंदिर में सोमवार को खुदाई हुई। ...और पढ़ें

44 साल से बंद मंदिर के गर्भगृह की खुदाई हुई। (तस्वीर जागरण)
44 साल से बंद मंदिर के गर्भगृह की खुदाई हुई। (तस्वीर जागरण)

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। संभल के बाद मुरादाबाद के दौलत बाग (झब्बू के नाले के पास) गौरी शंकर मंदिर में शिव परिवार, दुर्गा, शिवलिंग, मां काली की मूर्तियां खंडित अवस्था में मिली हैं। 1980 में मंदिर के आस-पास हिंदू आबादी थी, लेकिन हिंदू-मुस्लिम दंगे के बाद हिंदू परिवार यहां से पलायन कर गए। तब से मंदिर बंद था, जिससे वह खंडहर में तब्दील हो गया।

वर्तमान में मंदिर के आस-पास का क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य है। सिर्फ एक किन्नर रहती हैं, जो तीन साल पहले ही आकर बसी हैं। संभल प्रकरण के बाद बीते दिनों जिला प्रशासन तक गौरी शंकर मंदिर का मामला पहुंचा, जिसके बाद खुदाई हुई तो हकीकत सामने आ आई। पूर्वजों के बनवाए मंदिर की यह दशा देख स्वजन फफक पड़े। प्रशासन अब मंदिर को संवारेगा, इसके लिए काम शुरू हो गया है।

26 दिसंबर को डीएम को सौंपा गया था शिकायती पत्र

लाइनपार एकता कॉलोनी निवासी सेवाराम ने 26 दिसंबर को डीएम को एक शिकायती पत्र सौंपा था। उन्होंने बताया कि परिवार दौलतबाग (झब्बू के नाले के पास) में रहता था। आस-पास हिंदू आबादी थी, खेत थे। 1980 के दंगे में दादा गंगाराम की हत्या कर दी गई थी। उसके बाद पूर्वज समेत करीब 40 परिवार दौलतबाग से अपने-अपने मकान बेचकर लाइनपार जाकर बस गए।

उन्होंने बताया कि परदादा स्व. भीम सैन सैनी ने अपनी जमीन में गौरी शंकर मंदिर का निर्माण कराया था। सभी के पलायन करने के चलते मंदिर बंद हो गया और खंडहर में तब्दील हो गया। शिकायती पत्र के साथ सेवाराम ने बाकायदा मंदिर का नक्शा भी सौंपा। इसी के बाद डीएम ने एसडीएम सदर डॉ. राममोहन मीना के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी।

निगरानी के लिए पुलिस ने लगाए सीसीटीवी कैमरे

सोमवार दोपहर दो बजे से एसडीएम सदर डॉ. राममोहन मीना, सीओ अनीता दहिया, अपर नगर आयुक्त, अवर अभियंता की देखरेख और नागफनी पुलिस की सुरक्षा में गर्भगृह को खोदा गया। इस दौरान सेवाराम के अलावा इनके तहेरे भाई ओम शंकर, ताई कुंदनिया भी पहुंचीं। धर्म गुरु धीरशांत दास, अनिल सिक्का भी पहुंच गए।

मंदिर के गर्भगृह को मिट्टी से पाटकर इसके द्वार चिनाई करके बंद करा दिए थे। गर्भगृह की खुदाई पर खंडित मूर्तियां मिली हैं। जिनकी वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी कराई गई। निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए हैं। मंदिर परिसर में पीपल के पेड़ तक दीवार बताई जाती है। यह दीवार तोड़ दी गई थी और यहां पार्किंग स्थल बना लिया गया। अब मंदिर को मूर्ति रूप में लाने के लिए प्रशासन ने पहल शुरू कर दी है।

तीन साल पहले मोहिनी किन्नर ने बाहरी हिस्से की रंगाई पुताई

तीन साल पहले मोहिनी किन्नर ने मंदिर से सटा हुआ एक मकान खरीदा था। उन्होंने मंदिर की खंडहर हालत को देखते हुए पुलिस की निगरानी में बाहरी हिस्से की रंगाई पुताई कराई थी और आगे टूटी दीवार को बनवाकर गेट लगवाने का कार्य किया था। तब से मंदिर परिसर में वह दीपावली पर दीपक जलाकर पूजा करती आ रही हैं और रोजाना दीपक-बाती करती हैं। हालांगि गर्भगृह के द्वार की चिनाई होने, कूड़ा व मिट्टी भरी होने से बंद थी। कोई देखरेख करने वाला भी नहीं था तो मोहिनी किन्नर परिसर में ही दीपक जला देती थीं। मंदिर में गर्भगृह भूमि से करीब तीन से फीट गहरा है। मंदिर की दीवारों में भगवान की मूर्तियां भी बनी हैं।

मंदिर के थम्भ की नक्काशी 100 साल पुरानी

मंदिर में स्थित थम्भ की नक्काशी को देखकर लोगों ने 100 साल पुराने मंदिर का आंकलन किया है। इस मंदिर का जीर्णोद्वार सन 1954 में हुआ था। जिसका नक्शा भी सेवाराम ने जिला व पुलिस प्रशासन को सौंपा है। इस नक्शे को परिजन संभालकर रखे हुए थे, जिनका रंग भी पीला पड़ गया है।

शिकायतकर्ता सेवाराम ने बताया कि मेरे परदादा स्व.भीम सैन ने यह मंदिर अपनी जमीन में 100 साल पहले बनवाया था। सन 1980 में हिंदू-मुस्लिम दंगे में मेरे दादा गंगाराम की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद करीब 40 परिवार यहां से पलायन करके लाइनपार के विभिन्न मुहल्लों में जमीन खरीदकर बस गए। मेरे द्वारा जिलाधिकारी व पुलिस में 26 दिसंबर को शिकायत की गई थी। उस आधार पर पुलिस से मंदिर पहुंचकर गर्भ गृह की खोदाई कराई है। जिसमें शिव परिवार,शिवलिंग, दुर्गा मां व काली की मूर्तियां खंडित मिली हैं। दीवारों में बनीं भगवान की मूर्तियां भी क्षतिग्रस्त कर दी हैं।

किन्नर मोहिनी मंदिर की करती थीं देखभाल

किन्नर मोहिनी ने बताया कि तीन साल पहले जब मैंने मंदिर के बराबर में मकान खरीदा तो इसकी हालत देखी नहीं गई। मैंने किन्नर समाज की मदद से पुलिस की मदद से मंदिर की रंगाई पुताई बाहर से कराकर क्षतिग्रस्त दीवार को नई तरीके से चिनवाया था। दीपावली पर मंदिर की दीवार को सजवाती हूं और दीपक जलाती हूं। गर्भगृह बंद होने की वजह से मंदिर परिसर के बाहर ही रोजाना दीपक जलाकर पूजा करती हूं। यहां रहने वालों का कोई विवाद नहीं है। जिनका मंदिर है, वह भी समय समय पर मुझसे मिलकर जाते थे और खुश होते थे कि कम से मैं मंदिर परिसर में दीपक बाती करती हूं।

खुदाई में खंडित मूर्तियां मिलीं

एसडीएम सदर डॉ. राममोहन मीना ने बताया कि सेवाराम की ओर से जिलाधिकारी को शिकायती पत्र दिया गया था। इसके बाद मंदिर को जांचने के लिए टीम पहुंची। दरवाजा पर ताला लगा हुआ था। अंदर जाकर देखा तो सभी दरवाजे आदि ईंट से चिनकर बंद कर दिए गए थे। अंदर पक्का फर्श डाला हुआ था। इस फर्श को तोड़कर लगभग तीन फीट गहरी खोदाई करने पर प्रतिमाएं निकलीं। इसमें शिवलिंग ठीक है। इसके अलावा शिव, गणेश, पार्वती, कार्तिकेय और नंदी की प्रतिमाएं मिलीं जो खंडित हैं।

मंदिर में कूड़ा-करकट, ईंट, रोड़े आदि डालने के बाद फर्श डाला गया था। करीब 50 साल पहले तक परिवार में पूजा आदि होती थी। 1980 के बाद मंदिर के आस पास रहने वाले हिंदू परिवार पलायन कर गए थे। तभी ये बंद पड़ा हुआ था। अब मंदिर को उसके पूर्व स्वरूप में स्थापित किया जाएगा।

क्या था 1980 का दंगा

अगस्त 1980 को ईद की नमाज के दौरान एक जानवर ईदगाह में घुस आया था। तभी विवाद खड़ा हुआ और हिंदू मुस्लिम दंगा भड़क गया। महीनों तक कर्फ्यू लगा था। कुछ लोगों की मौत भी हुई थी। इसी दंगे में भीम सैन की हत्या हुई थी। तभी हिंदू परिवारों ने यहां से पलायन कर दिया था। केवल मंदिर ही यहां पर रह गया था।