मुरादाबाद,जेएनएन। नोटबंदी के दौरान पुराने एक हजार व पांच सौ रुपये के नोट बैैंकों के जमा करने के मामले में आयकर जोन के बीस सर्राफ फंस गए हैैं। इन पर विभाग ने तीन करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसका सराफा कमेटी ने विरोध करना शुरू कर दिया है।

आठ नवंबर 16 को सरकार ने पुराने एक हजार व पांच सौ के नोट को चलन से हटा दिया था। पुराने नोट से केवल रेलवे का टिकट खरीदने, पेट्रोल व डीजल भरवाने, बिजली बिल आदि जमा करने की छूट दी थी। जिसके पास पुराने नोट थे, उसे बैैंकों में जमा करना था। पुराने नोट से किसी प्रकार के सामान की बिक्री करने पर प्रतिबंध था। इसके बाद भी काफी सराफा कारोबारियों ने पुराने नोट लेकर गहने आदि की बिक्री किया और बैैंकों में जमा किया था।

157 सर्राफ में से 20 नहीं दे पाए जवाब

नोटबंदी के बाद आयकर विभाग ने बैैंकों से पुराने नोट जमा करने की रिपोर्ट मांगी थी। इसमें आयकर जोन के 157 सराफा कारोबारियों ने 50 करोड़ से अधिक पुराने एक हजार व पांच पांच सौ रुपये के नोट जमा किए थे। आयकर विभाग ने मामले की जांच शुरू कर सर्राफों को नोटिस जारी किया था। आयकर की जांच में जवाब से 137 सर्राफ को दोष मुक्त कर दिया गया लेकिन, मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर, अमरोहा, सम्भल व बदायूं के बीस सराफ जवाब नहीं दे सके। आयकर अधिकारियों ने बीस सर्राफ पर तीन करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। अपर आयकर आयुक्त यदुवीर सिंह ने बताया कि नोटबंदी के दौरान सही जवाब नहीं देने पर जोन के बीस सर्राफ पर जुर्माना लगाया गया है।

सराफा कमेटी उतरी विरोध में

सराफा व्यापारी कमेटी के अध्यक्ष नीरज अग्रवाल ने बताया कि नोटबंदी के दौरान सरकार ने सराफ को पुराने एक हजार व पांच सौ के नोट से गहने बेचने की छूट दे रहा था। इसके आधार पर सराफ ने कारोबार किया। आयकर विभाग ने देश भर के 15 हजार सर्राफ पर जुर्माना लगाया है। देश भर के सराफा संगठनों ने विरोध किया जा रहा है। सरकार सर्राफ के द्वारा राजस्व का लक्ष्य पूरा करना चाहती है।  

Posted By: Narendra Kumar

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