जलशक्ति एवं सिंचाई मंत्री के जिले मीरजापुर में वेतन एरियर बिलों में करोड़ों का घोटाला, मुकदमा दर्ज होते ही बाबू फरार
मीरजापुर में लघु डाल नहर प्रखंड कार्यालय में 15 करोड़ रुपये से अधिक के वेतन एरियर घोटाले का खुलासा हुआ ...और पढ़ें

मीरजापुर सिंचाई विभाग में करोड़ों का वेतन एरियर घोटाला: बाबू फरार, जांच शुरू।
HighLights
मीरजापुर में 15 करोड़ से अधिक का वेतन एरियर घोटाला उजागर।
बाबू जितेंद्र कुमार व अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज, बाबू फरार।
जल शक्ति मंत्री के गृह जनपद में बड़े घोटाले से हड़कंप।
जागरण संवाददाता, मीरजापुर। लघु डाल नहर प्रखंड कार्यालय के डीडीओ एवं मीरजापुर नहर प्रखंड के अधिशासी अभियंता प्रमोद कुमार ने विभाग में तैनात बाबू जितेंद्र कुमार व कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ शहर कोतवाली में तहरीर दी। आरोप लगाया कि इन आरोपितों ने विभाग में तैनाती के दौरान 344 लाभार्थियों के नाम पर 15 करोड़, 58 लाख, 61 हजार पांच रुपये का भुगतान करके रुपये का गबन किया है।
इसका मामला प्रकाश में आने पर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर नामजद बाबू जितेंद्र कुमार व कुछ अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी है। शहर कोतवाल दयाशंकर ओझा ने बताया कि आरोपितों पर मुकदमा दर्ज करके जांच की जा रही है। हालांकि बाबू फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
जल शक्ति,बाढ़ नियंत्रण एवं सिंचाई - जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के गृह जनपद में लघु डाल नहर प्रखंड कार्यालय में अवशेष वेतन एरियर के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। यह भुगतान मीरजापुर नहर प्रखंड के अधिकारी डीडीओ के कार्यालय से किया गया है।
घोटाले का मामला एक-दो वर्ष का नहीं है, बल्कि कई वर्षों से किए जाने का मामला सामने आया है। इसकी खबर लगते ही शासन से लेकर विभाग के उच्चाधिकारियों में खलबली मच गई है। इसे लेकर मीरजापु नहर प्रखंड में तैनात बड़े बाबू जितेंद्र कुमार को निलंबित करते हुए जांच शुरू कर दी गई है।
कहा तो यहां तक जा रहा है कि इसमें मीरजापुर नहर प्रखंड के कई अधिकारी व कर्मचारियों की मिलीभगत है। हालांकि अभी तक प्रथम जांच में कुल 344 लाभार्थियों को 15 करोड़, 58 लाख, 61 हजार पांच रुपये का भुगतान किए जाने का मामला पकड़ा गया है। आगे जांच में और धनराशि बढ़ सकती है।
कार्यालय महालेखाकार प्रयागराज की ओर से 18 सितंबर को मुख्य अभियंता दो नलकूप विभाग वाराणसी को जारी किए गए पत्र के अनुसार कार्यालय अधिशासी अभियंता लघु डाल मीरजापुर नहर प्रखंड ने जनवरी 2026 से अगस्त 2026 तक की अवधि में कोषागार के माध्यम से पारित कराए गए अवशेष वेतन एरियर बिलों के सत्यापन के दौरान मुख्यत: दो प्रकार के मामले पाए गए हैं।
एक में विभिन्न प्रकरण में पूर्व के वर्षाें में अवरुद्ध की गई वार्षिक वेतन वृद्धि अवमुक्त किए जाने के फलस्वरूप एरियर भुगतान एवं दूसरे के विभिन्न प्रकरणों में एक जनवरी 2026 से सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन निर्धारण कर कर्मचारियों को एरियर की शुद्धता एवं नियमसंगतता की पुष्टि के लिए कई बिंदुओं पर अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
वेतन वृद्धि रोके जानेे व पुन : अवमुक्त किए जाने के संबंधी मामले
लघु डाल नहर खंड के कार्यरत कुछ पांच पर्यक्षकों एवं सींचपालों की वार्षिक वेतन वृद्ध अधीक्षण अभियंता नलकूप मंडल मीरजापुर द्वारा निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित पाए जाने और कार्य में लापरवाही के आधार पर एक जनवरी 2022 से एक जनवरी 2023 तथा एक जुलाई 2023 से रोके जाने का उल्लेख एरियर गणना प्रपत्रों में किया गया है।
परीक्षण के दौरान यह स्पष्ट नहीं हो सका कि संबंधित कर्मचारियों की वेतन वृद्धि कितनी अवधि या कितने वर्षाें के लिए तथा किस समक्ष प्राधिकारी के अदेश पर रोकी गई थी। इसके साथ ही वेतन वृद्धि रोकने संबंधी समक्ष प्राधिकारी के मूल आदेश। की प्रति संबंधित एरियर बिलों के साथ संलग्न नहीं पाई गई।
ड्यू एवं ड्रान वेतन में अंतर
विभिन्न कर्मचारियों के एरियर गणना प्रपत्रों में ड्यू एवं ड्रान स्टेटमेंट के परीक्षण में यह पाया गया कि ड्यू एवं ड्रान वेतन के मध्य चार से पांच वार्षिक वेतन का अंतर दर्शाया गया है। जो प्रथमदृष्टया संदिग्ध लग रहा है। इसमें 22 जनवरी वर्ष 2026 के दौरान 11 लाख 69 हजार 440 रुपये दो कर्मचारियों आदर्श वर्मा व रोहित सिंह की एक जनवरी 2022 से रोकी गई वार्षिक वेतन वृद्धि को अवमुक्त करते हुए एरियर का भुगतान किया गया है।
दोनों कर्मचारियों के संबंध में एक जनवरी 2022 को ड्रान वेतन 38,100 तथा उसी दिन ड्यूू वेतन 44, 100 दर्शाया गया है। जबकि वेतन मैट्रिक के अनुसार 38,100 के पश्चात अगला वेतन वार्षिक वृद्धि 39, 200 होना चाहिए। ऐसी स्थिति में 44,100 को ड्यू वेतन के रूप में दर्शाए जाने का आधार स्पष्ट नहीं है। अत: स्पष्ट किया जाए कि उक्त कर्मचारियों को कितनी वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ दिया गया। यही नहीं एक ही कर्मचारियों को एक से अधिक बार भुगतान किया गया है।
महालेखाकार की टीम ने जांच शुरू की
जिले के लघु डाल नहर प्रखंड कार्यालय के मीरजापुर नहर प्रखंड कार्यालय से अवशेष वेतन एरियर के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले के मामले की जानकारी पर एजी आफिस प्रयागराज की आडिट टीम मीरजापुर पहुंची। एसी के नेतृत्त्व में चार सदस्यीय टीम वर्ष 2016 से किए गए कार्यो की भुगतान की जांच कर रही है।
पता कर रही है कि इस दौरान कौन -कौन से कार्य कराए गए और किन- किन फर्म को कितने रुपये का भुगतान किया गया है। हालांकि टीम कुछ नहीं बोल रही हैं ,लेकिन चर्चा है कि इसमें कई अधिकारियों का गले फंस सकते है। अभी तक प्रथम जांच में कुल 344 लाभार्थियों को 15 करोड़, 58 लाख, 61 हजार पांच रुपये का भुगतान किए जाने का मामला पकड़ा गया है। आगे जांच में और धनराशि बढ़ सकती है।
कार्यालय महालेखाकार प्रयागराज की ओर से अधीक्षण अभियंता वाराणसी को जारी किए गए पत्र के अनुसार कार्यालय अधिशासी अभियंता लघु डाल मीरजापुर नहर प्रखंड ने जनवरी 2026 से अगस्त 2026 तक की अवधि में कोषागार के माध्यम से पारित कराए गए अवशेष वेतन एरियर बिलों के सत्यापन के दौरान मुख्यत: दो प्रकार के मामले पाए गए हैं।
एक में विभिन्न प्रकरण में पूर्व के वर्षाें में अवरुद्ध की गई वार्षिक वेतन वृद्धि अवमुक्त किए जाने के फलस्वरूप एरियर भुगतान एवं दूसरे के विभिन्न प्रकरणों में एक जनवरी 2026 से सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन निर्धारण कर कर्मचारियों को एरियर की शुद्धता एवं नियमसंगतता की पुष्टि के लिए कई बिंदुओं पर अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
शासन ने सिंचाई विभाग में लगभग 16 करोड़ रुपये के हुए एरियर भुगतान के घोटाले में कड़ा रूख अपनाया है। विभाग से लगभग 20 वर्षाे में कराए गए कार्यो का आकड़ा मांगा गया है। जिसमें 150 करोड़ रुपये के एरियर व कराए गए कार्यो के भुगतान से मामला जुड़ा है । जो अधिकारियों व कर्मचारियों की गले की फांस बन चुकी है। इस जांच के दायरे में कई अधिशासी अभियंता, एई व जेई तथा बाबू दायरे में आएंगे। जिन्होंने कराए गए कार्यों के भुगतान पर हस्ताक्षर किया है।
सिंचाई विभाग के मीरजापुर कैनाल डिवीजन के लघुडाल पंप कैनाल खंड में वर्ष 2024-25 के दौरान खंड के 344 कर्मचारियों के नाम पर लगभग 16 करोड़ रुपये का भुगतान फर्जी तरीके से कर राशि गबन किए जाने का मामला सामने आया है। विभाग को इसकी जानकारी तब हुई, जब मामला उजागर हुआ और एक बाबू ने इसमें से कई करोड़ रुपये जमा कर दिए। इसके बाद विभाग के उच्चाधिकारियों को गड़बड़ी की आशंका हुई और छानबीन शुरू की गई।
