जागरण संवाददाता, मीरजापुर : कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों का इलाज करने वाले मंडलीय चिकित्सालय व मेडिकल कालेज के 300 चिकित्सक व कर्मचारियों को पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिल रहा है। ऐसे में उनके सामने परिवार का खर्च चलाने की समस्या खड़ी हो गई। वेतन नहीं मिलने से पहले दशहरा और अब दीपावली का त्योहार फीका होने वाला है। सरकार के इस रवैये को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश है।

मंडलीय चिकित्सालय के करीब ढाई सौ कर्मचारी पिछले दो साल से लगातार मरीजों का इलाज व सेवा कर रहे हैं। कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर इलाज किए। इसके अलावा पिछले कुछ महीने से मेडिकल कालेज के 60 चिकित्सक भी मंडलीय चिकित्सालय में बैठ रहे हैं। वे समय से अपनी डयूटी करने के बावजूद वेतन के लिए परेशान हैं। सबसे अधिक दिक्कत तो संविदा कर्मियों को हो रही है। वे किराए के मकान में रह रहे हैं। ऐसे में तीन महीने से मकान मालिक का किराया नहीं देने पर वे मकान खाली करने को लेकर परेशान हैं। वेतन नहीं मिलने से वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों ने कहा कि मंडलीय चिकित्सालय को जबसे मेडिकल कालेज का दर्जा दिया गया है, तभी से यहां के कर्मचारियों का वेतन रूका हुआ है। कहा जा रहा है कि कुछ टेक्निकल कारणों से वेतन नहीं मिल रहा है। जैसे ही दिक्कत दूर होगी, वेतन दिया जाने लगेगा। उनका कहना हैं कि सरकार भी इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। अधिकृत कंपनी को कर्मचारियों का मानदेय देने के लिए पत्र लिखा गया है। दीपावली से पहले मानदेय नहीं मिलेगा तो शासन को अवगत कराया जाएगा।

आलोक अग्रवाल, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक मंडलीय चिकित्सालय

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