जागरण संवाददाता, जिगना (मीरजापुर) : छानबे क्षेत्र के मिनी सचिवालय या पंचायत भवन का हाल अनदेखी के चलते बदहाल व लोगों के कब्जे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि काशी सरपती गांव में प्रधानपति ने आवास के बदले में एक महिला को पंचायत भवन में रहने के लिए चाभी दे दिया है। जबकि मिनी सचिवालय या पंचायत भवन पर सरकारी धन खर्च किए जाते है इसके बाद भी बदहाली की हालत में भवन है। ग्रामीणों ने संबंधित के खिलाफ जांच कराकर पंचायत भवनों को कब्जा मुक्त कराने की मांग की है।

छानबे क्षेत्र में सरकारी धन से निर्मित मिनी सचिवालय या पंचायत भवन पंचायत प्रतिनिधियों की कारगुजारियों की पोल खोलते है। जहां सरकारी धन से इनका रखरखाव तो किया जा रहा है पर इनकी सुरक्षा की सुध लेने वाला कोई नहीं है। ग्राम पंचायत काशी सरपति जहां मिनी सचिवालय के रंग-रोगन कराने के नाम पर सरकारी धन का अपव्यय कर ग्रामपंचायत के नुमाइंदों ने मिनी सचिवालय की चाभी ग्रामीणों को दे दिया। जिसमें बकरी व गृहस्थी का सामान रखवा दिया एक ओर सरकार पंचायतों के विकास हेतु लाखों रुपया खर्च कर रही वही पंचायतों में बनी मिनी सचिवालय अपनी बदहाली पर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। पंचायत भवन की बदहाली का आलम यह है कि गंगा किनारे उक्त ग्रामपंचायत के मिनी सचिवालय में बने शौचालय में कई वर्षो से ताला बंद होने के कारण पड़ोसी दरवाजे पर ऊपली पाथ रहे हैं। पंचायत भवन पर ग्राम विकास अधिकारी के उपस्थित का अंकन न होने से ग्रामीण आए दिन ब्लाक मुख्यालय का चक्कर काट रहे हैं। इस संबंध में ग्राम पंचायत अधिकारी उत्तम सिंह यादव ने बताया कि जबरन ग्रामीण पशु बांध रहे हैं इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। महिला ने लगाया रुपया देने का लगाया आरोप

पंचायत भवन में सामान रख रह रही गरीब महिला जयपत्ती पत्नी लालचन्द्र ने आरोप लगाते हुए बताया कि प्रधान पति ने चार वर्ष से दस हजार रुपए आवास देने के नाम पर लिया है लेकिन आवास नहीं दे रहे हैं। मेरे पास जर्जर कच्चा मकान है ऐसे में प्रधानपति ने पंचायत भवन की चाभी दी है इसलिए रह रही हूं।

Posted By: Jagran

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