जासं, अहरौरा (मीरजापुर) : सिक्खों के दसवें गुरू, गुरु गो¨वद ¨सह का तीन दिवसीय प्रकाश उत्सव नगर के ऐतिहासिक गुरुद्वारा दस्ख्ती साहब में परंपरागत ढंग से मनाया गया। सत्यानगंज मुहल्ले में स्थित सिक्ख मतावलंबियों का प्राचीन गुरुद्वारा है जहां स्वयं गुरू गो¨वद ¨सह महाराज पधारे थे। मुगलों के धार्मिक आक्रमण के कारण सनातन धर्म को मानने वाले ¨हदुओं की रक्षा के लिए सिक्ख धर्म का बड़ा योगदान रहा है। जिन ¨हदुओं को मुगलों की धार्मिक आक्रमण से खतरा लगा या नहीं लगा तो ¨हदुओं की रक्षा के लिए सिक्ख धर्म को अपना लिया। धीरे-धीरे सिक्खों को हिन्दू धर्म रक्षक सिपाही का दर्जा प्राप्त हो गया। अहरौरा गुरुद्वारा को दस्तखती गुरुद्वारा भी कहा जाता है क्योंकि आज भी गुरु गो¨वद ¨सह का हस्ताक्षरित ग्रंथ यहां मौ•ाूद है। तीन दिवसीय प्रकाशोत्सव में अहरौरा के बाहर से सैकड़ों की संख्या में सिक्ख मतावलम्बियों का जमावड़ा होता है। इसका उदाहरण यहां देखने को मिला। समापन अवसर पर रविवार शाम को सत्यानगंज से शोभायात्रा निकली। गुरु महाराज की शोभायात्रा का समापन तकिया बाजार में स्थित नगर सेठ के यहां जाकर रात्रि में किया गया। कीर्तन-भजन के साथ साथ अरदास का आयोजन भी हुआ। गुरुद्वारा के संरक्षक सरदार बनवारी ¨सह, ईश्वर ¨सह, गुलाब ¨सह आदि रहे। अहरौरा थाना प्रभारी मनोज ठाकुर व नगर चौकी प्रभारी आलोक ¨सह सुरक्षा व्यवस्था में लगे रहे।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप