जागरण संवाददाता, मीरजापुर : जनपद के निजी स्कूलों की मनमानी पर जल्द ही अंकुश लगेगा। जनपदीय शुल्क नियामक समिति की अनुमति बिना स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से शुल्क वृद्धि करने सहित अन्य वसूली को संज्ञान लेते हुए बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को जांच का निर्देश दिया है। जांच में बिना अनुमति शुल्क वृद्ध करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई होगी। दैनिक जागरण द्वारा बीते तीन अप्रैल के अंक में नियमों को ताक पर रखकर मनमानी कर रहे निजी स्कूल, शीर्षक से अभिभावकों की समस्याओं को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था।

अप्रैल माह से ही निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए मारामारी शुरू हो जाती है। हर वर्ष अभिभावकों की जेब इन निजी स्कूलों में कटती है। प्रबंधन द्वारा अभिभावकों से प्रवेश, मासिक सहित मनमाना फीस वसूल किया जाता है साथ ही निर्धारित स्थानों से कापी-किताब और यूनिफार्म खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। यह हालात तब है जबकि प्रदेश में उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क निर्धारण अध्यादेश 2018 लागू हो चुका है और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनपद में निजी स्कूलों की निगरानी के लिए जनपदीय शुल्क नियामक समिति का भी गठन हो चुका है । बावजूद इसके निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से शुल्क वृद्धि करते हुए निजी स्थानों से कापी-किताब खरीदने के लिए विवश किया जाता है। मीरजापुर सेवा समिति के संयोजक दिलीप सिंह गहरवार सहित आम जनमानस ने मंडलायुक्त आनंद कुमार सिंह, जिलाधिकारी अनुराग पटेल और बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी से लिखित शिकायत किया है। जिसमें कहा कि नगर के सेंट मैरीज स्कूल, एसएन पब्लिक स्कूल, सेठ द्वारका प्रसाद बजाज स्कूल, संस्कार पब्लिक स्कूल में अभिभावकों से मनमाना शुल्क लिया जा रहा है। कहा कि इन स्कूलों में अभिभावकों से खुली लूट मची है और अभिभावकों को मजबूरन जमा करना पड़ रहा है। कई स्कूलों में फीस जमा न करने अथवा पूछताछ करने मात्र पर बच्चों को स्कूल से बाहर कर दिया जा रहा है। -------------

स्कूल प्रबंधन को इन नियमों का करना है पालन

उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क निर्धारण अध्यादेश 2018 जारी होने के बाद कोई भी स्कूल शुल्क वृद्घि प्रति वर्ष पांच वर्ष से ज्यादा नही करेंगे।साथ ही ड्रेस में पांच वर्ष तक कोई भी परिवर्तन नही करेंगे, परिवर्तन करने से तीन माह पूर्व प्रस्ताव मंडलीय समिति के समक्ष रखेंगे। समिति द्वारा विचार करने के बाद युक्ति संगत पाने के बाद ही अनुमति देगी। साथ ही किसी भी निश्चित दुकान से कापी, किताब आदि खरीदने के लिए बाध्य करेंगे अथवा स्कूल में बिक्री करेंगे। सभी विद्यालय फीस का विवरण अपने निर्धारित साइट पर अपलोउ करेंगे और बोर्ड पर चस्पा भी करेंगे। स्कूल में पहली बारप्रवेश लेने वाले बच्चे सिर्फ एक बार ही प्रवेश शुल्क लिया जाएगा और अन्य बच्चों से प्रवेश शुल्क नही लिया जाए।

Posted By: Jagran