जागरण संवाददाता, मीरजापुर : जैन धर्म के 24वें तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म दिवस कटरा बाजीराव स्थित पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। जैन मंदिर में महावीर स्वामी का जलाभिषेक एवं पूजन मुनिश्री श्री 108 प्रबल सागरजी महराज एवं आर्यिका श्री 105 विजेता श्रीमाताजी व विशम्मा श्री माता के मार्गदर्शन में हुआ। भगवान महावीर के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को जियो और जीने दो के मार्ग पर चलना होगा तभी आत्मा को शांति मिलेगी।

कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह सात बजे शोभा यात्रा से हुआ। शोभा यात्रा इमरती रोड, भैंसहिया टोला, गनेशगंज, लालडिग्गी, बूढ़ेनाथ, सत्तीरोड, त्रिमोहानी, धुंधीकटरा, चौबेटोला होते हुए बड़ा जैन मंदिर में समाप्त हुई। संजीव कुमार जैन ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि चारों ओर हिसा का तांडव मचा हुआ है और चारों तरफ राग द्वेष की भावना बढ़ रही है। क्रोध माया लोभ हर तरफ पसरा हुआ है। शिष्टाचार समाप्त होता जा रहा था, तब भारत के वैशाली राज्य में अहिता के अग्र दूत भगवान महावीर का जन्म हुआ। बचपन से ही उन्होंने अपने आचरण में अहिता को अपनाया था। जिओ और जीने दो तथा अहिसा परमो धर्म इन दो मुख्य उपदेश के आधार पर उन्होंने आत्मा कल्याण की राह बताया। विमल कुमार जैन ने कहा कि भगवान महावीर ने अहिता को ही सबसे बड़ा धर्म बताया था। अश्वनी जैन ने कहा कि भगवान महावीर ने एक बार कहा था कि चिता उसे होती है, जो पिछली बात याद करता है। दीपचंद्र जैन ने कहा कि शांति व प्रसन्नता वापस तभी आ सकती है, जब हम प्रत्येक प्राणी में अपने आप को देखें। इस दौरान पूनमचंद्र जैन, अरूण जैन, अनिल जैन, दानचंद्र जैन, राजेश जैन, विक्रम जैन, शरद जैन, सुनील जैन, संतोष जैन, मनोज जैन, पदम जैन, राकेश जैन, सुधीर जैन, काका रेदानी, अनिता जैन, सपना जैन, सुमन जैन, चंद्रकांता जैन, बबिता जैन, अभिलाषा जैन, संगीता जैन आदि मौजूद थे।

Posted By: Jagran