प्रशांत यादव, मीरजापुर

यूपी की रोडवेज की लंबी दूरी की बसें जनरथ अब सेना के सेवानिवृत्त चालक चलाने का काम करेंगे। इसकी शुरुआत प्रदेश के चार क्षेत्रों में रोडवेज बतौर पायलट प्रोजेक्ट कर रहा है। इसके बाद पूर्वाचल के वाराणसी, प्रयागराज, आजमगढ़, गोरखपुर तथा विध्याचल मंडल के जिलों में भी इस नियम को लागू किया जाएगा।

प्रदेश में रोडवेज की बसों से लगातार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर चिता जताई गई है। सर्वे में पाया गया है कि चालकों द्वारा लापरवाही से बस चलाने की वजह से ऐसा हो रहा है। अनुभव की कमी भी दुर्घटना का कारण मुख्य कारण बताया गया है। इसको देखते हुए शासन ने बस दुर्घटना पर काबू पाने के लिए बोर्ड मीटिग में परिवहन निगम मुख्यालय यूपी रोडवेज के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने अधिकारियों संग मंथन किया। एमडी डॉ. राजशेखर ने बताया कि यात्रियों को सुरक्षित यात्रा दी जाएगी। जनरथ बसों की 2016 से 2019 के बीच दुर्घटनाओं की समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि चालकों की अनुभव की कमी के चलते दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसलिए अनुभवी चालकों की आवश्यकता है, जिसके लिए सेना के सेवानिवृत्त चालकों को लखनऊ, गाजियाबाद, गोरखपुर एवं आगरा में पांच-पांच बसों पर दो चालक प्रति बस के आधार पर रखेंगे। तीन महीने के लिए पायलट प्रोजेक्ट होगा। इसके बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। अनुभवी चालकों से दुर्घटनाओं में कमी के साथ साथ डीजल खर्च में भी कमी आएगी। बस अड्डों को भी और बेहतर करने के लिए तीन करोड़ से अधिक खर्च किया जाएगा। कानपुर के रावतपुर में रोडवेज कार्यशाला की भूमि मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को उपयोग के लिए दिए जाने को भी मंजूरी दी गई है।

वर्जन

शासन की ओर जनरथ बसों को सेना के सेवानिवृत चालकों से चलवाने की योजना बनाई जा रही है। इसपर काम भी चल रहा है। जैसा ऊपर का आदेश होगा वैसा किया जाएगा।

-हरिशंकर पांडेय, एआरएम परिवहन निगम मीरजापुर

Posted By: Jagran

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