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मीरजापुर में मनरेगा बंद, नहीं मिला पारिश्रमिक, श्रमिक परेशान, 37 करोड़, 54 लाख बकाया

By Amit Kumar Tiwari Edited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 14 Sep 2026 03:02 PM (IST)

मीरजापुर में मनरेगा योजना बंद होने के बाद नई वीबी जी राम जी योजना शुरू हुई है, लेकिन मनरेगा का ...और पढ़ें

मीरजापुर में मनरेगा बंद, 37 करोड़ बकाया, श्रमिक आर्थिक संकट में।

मीरजापुर में मनरेगा बंद, 37 करोड़ बकाया, श्रमिक आर्थिक संकट में।

HighLights

  1. मनरेगा योजना मीरजापुर में बंद, नई योजना शुरू।

  2. श्रमिकों का 37.54 करोड़ रुपये बकाया भुगतान लंबित।

  3. बकाया न मिलने से श्रमिकों को आर्थिक परेशानी।

जागरण संवाददाता, मीरजापुर। मनरेगा योजना बंद हो गई है, उसके स्थान पर नई वीबी जी राम जी योजना आरंभ हो गई है। इसमें ग्रामीणों को काम तो मिल रहा है, लेकिन पुराना बकाया पारिश्रमिक का भुगतान लटका हुआ है। बकाया पारिश्रमिक का भुगतान न होने से ग्रामीणों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मनरेगा योजना में कराए गए कार्य का 37 करोड़, 54 लाख, 13 हजार रुपये बकाया है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह विकसित भारत-गारंटी फार रोजगार व आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी जी राम जी) योजना एक जुलाई से आरंभ हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को काम दिलाने के लिए पूर्व में संचालित मनरेगा योजना में तीन वर्षाें में लगभग 37 करोड़, 54 लाख, 13 हजार रुपये बकाया है। इसमें श्रम, सामग्री और प्रशासनिक खर्च भी शामिल है। इस बकाए के चलते अकुशल श्रमिकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

उन्हें काम तो मिल रहा है, लेकिन बकाया पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है। मजदूरी का भुगतान लंबित होने से रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में श्रमिकों के सामने संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में योजना के तहत तालाब, मेड़बंदी, रास्ता निर्माण समेत विभिन्न कार्य कराए जाते हैं। जनपद के 12 ब्लाकों के 809 ग्राम पंचायतों में लगभग 31,07,961 आबादी है। जनपद में 3,20,149 परिवार में 4,50,000 व्यक्ति हैं। साथ ही कुल 1,26,050 सक्रिय जाबकार्ड धारक हैं।


वित्तीय वर्ष : मनरेगा का बकाया

2024-25 : 11,89,31,000

2025-26 : 24,73,23,000

2026-27 : 91,59,000

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कुल योग : 37,54,13,000 रुपये

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मनरेगा योजना में तीन वर्षाें में लगभग 37 करोड़, 54 लाख, 13 हजार रुपये बकाया है। इसके भुगतान के लिए शासन को डिमांड भेजा गया है। बजट मिलते ही संबंधित के खाते में सीधे भुगतान किया जाएगा।

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श्वेतांक सिंह, उपायुक्त श्रम रोजगार।