मीरजापुर की रिचा गुप्ता ने शुरू किया टेडी बियर और तोरण बनाने का काम, अब 50 महिलाओं को भी बना रहीं आत्मनिर्भर
मीरजापुर की रिचा गुप्ता ने टेडी वियर और तोरण बनाने का व्यवसाय शुरू कर 50 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। ...और पढ़ें
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रिचा गुप्ता ने टेडी बियर और तोरण बनाकर कर रही कमाई।
HighLights
रिचा गुप्ता ने 50 महिलाओं को टेडी वियर निर्माण से जोड़ा।
महिलाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजारों में उत्पाद बेचकर कमा रहीं।
यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भरता और आय का अवसर दे रही।
जागरण संवाददाता, मीरजापुर। घर की दहलीज तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। रिचा गुप्ता और उनके साथ जुड़ी 50 महिलाओं की कहानी इसी जज्बे की मिसाल है।
पांच वर्ष पहले महज चार महिलाओं के साथ शुरू हुआ टेडी वियर निर्माण का छोटा सा प्रयास आज दर्जनों परिवारों के लिए आय और आत्मसम्मान का माध्यम बन चुका है। यह पहल न केवल रोजगार सृजन, बल्कि नारी सशक्तिकरण का भी उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।
नगर के महुवरिया निवासी रिचा गुप्ता बताती हैं कि वर्ष 2021 के आसपास उन्होंने टेडी वियर निर्माण का कार्य शुरू किया था। पारिवारिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने खुद के पैरों पर खड़े होने का निर्णय लिया। पहले ब्यूटी पार्लर का काम करती थीं, लेकिन उससे सीमित आय होती थी।
इसी दौरान बाजार में टेडी वियर की बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने इस क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया। दिल्ली और पानीपत से कच्चा माल मंगाकर घर पर ही टेडी वियर तैयार करना शुरू किया।
शुरुआत आसान नहीं थी। डिजाइन तैयार करने से लेकर कटिंग, सिलाई और फिनिशिंग तक हर काम खुद सीखना और सिखाना पड़ा। धीरे-धीरे आसपास की महिलाओं को इस काम से जोड़ा गया। रिचा ने उन्हें प्रशिक्षण दिया और घर बैठे काम करने का अवसर उपलब्ध कराया। देखते ही देखते चार महिलाओं का समूह बढ़कर 50 महिलाओं के परिवार में बदल गया।
संघर्ष से सफलता तक की कहानी
रिचा गुप्ता कहती हैं कि शुरुआत सिर्फ खुद को संभालने के लिए की थी, लेकिन जब दूसरी महिलाओं को भी इससे जुड़ते देखा तो लगा कि यह सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का मिशन है। इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि अवसर का इंतजार करने के बजाय यदि पहल की जाए तो छोटे-से प्रयास भी बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं।
दिल्ली-पानीपत से आता है कच्चा माल
टेडी वियर निर्माण के लिए आवश्यक कपड़ा, फर फैब्रिक, रुई, बटन, आंखें, चेन और अन्य सजावटी सामग्री मुख्य रूप से दिल्ली और हरियाणा के पानीपत से मंगाई जाती है। बेहतर गुणवत्ता और डिजाइन के लिए अधिकांश कच्चा माल बड़े थोक बाजारों से खरीदा जाता है। इसके बाद मीरजापुर में कटिंग, सिलाई और फिनिशिंग का काम महिलाएं करती हैं।
पूर्वांचल के बाजारों में डिमांड
जिले में तैयार टेडी वियर वाराणसी, प्रयागराज, राबर्ट्सगंज (सोनभद्र), चुनार व विंध्याचल के बाजारों में भेजे जाते हैं। जन्मदिन, शादी-विवाह, वेलेंटाइन डे और अन्य विशेष अवसरों पर मांग बढ़ने से ऑर्डर भी बढ़ जाते हैं। सीजन में कारोबार का टर्नओवर लाखों रुपये तक पहुंच जाता है।
मीशो और फ्लिपकार्ट पर भी करती हैं बिक्री
टेडी वियर के साथ अब महिलाओं ने सजावटी तोरण द्वार के निर्माण में भी कदम बढ़ाया है। इनके बनाए आकर्षक तोरण द्वार की बिक्री आनलाइन प्लेटफॉर्म मीशो और फ्लिपकार्ट पर शुरू हो चुकी है। इसकी कीमत 500 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक है। रिचा बताती हैं कि त्योहारों के दौरान तोरण द्वार की मांग काफी बढ़ जाती है।
विशेष रूप से दशहरा से दीपावली तक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों बाजारों में अच्छी बिक्री होती है। घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों की सजावट के लिए लोग इन उत्पादों को पसंद कर रहे हैं।
घर खर्च में बन रहीं सहारा
टेडी वियर निर्माण से जुड़ी महिलाओं की आय उनके काम और ऑर्डर के अनुसार तय होती है। महिलाओं को हर माह औसतन पांच से छह हजार रुपये तक की आय हो जाती है। त्योहारों, शादी-विवाह और विशेष अवसरों के सीजन में ऑर्डर बढ़ने पर कमाई भी बढ़ जाती है। महिलाओं का कहना है कि यह आय भले बहुत बड़ी न हो, लेकिन घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई, दवा और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
हम टेडी वियर जरूर बनाते हैं, लेकिन असल में हम महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का भविष्य गढ़ रहे हैं। हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हों और अपने सपनों को साकार करें। -रिचा गुप्ता, मेनुफैक्चरर, न्यू स्माइली वर्ल्ड, तरकापुर, संकट मोचन।
