विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

विंध्य क्षेत्र में शुरू होगी मखाना की खेती, किसानों को आय दोगुनी करने का मिलेगा मौका

Published: Wed, 05 Aug 2026 08:08 PM (GMT+05:30)

मीरजापुर के विंध्य क्षेत्र में उद्यान विभाग मखाना की खेती को बढ़ावा दे रहा है, जिससे किसानों की आय दोगुनी होने की उम्मीद है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. विंध्य क्षेत्र में मखाना की खेती की तैयारी।

  2. किसानों की आय बढ़ाने हेतु सरकारी प्रोत्साहन।

  3. 57 हेक्टेयर में होगी मखाना की खेती।

जागरण संवाददाता, मीरजापुर। विंध्य क्षेत्र में अब मखाना की खेती कराने की तैयारी की जा रही है। इससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है। उद्यान विभाग की ओर से किसानों को परंपरागत खेती करने के साथ ही मखाना की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस वर्ष जनपद में कुल 57 हेक्टेयर में मखाना की खेती कराई जाएगी। सरकार की ओर से इच्छुक किसानों को अनुदान भी दिया जाएगा।

एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में मखाना की खेती कराई जाएगी। उप निदेशक उद्यान मेवा राम ने बताया कि 31 हेक्टेयर में मखाना की खेती और 26 हेक्टेयर में तालाब विधि से मखाना की खेती कराने की योजना है।

वर्तमान में मखाना पानी में उगने वाले पौधों का बीज है, जिसकी मार्केट में काफी मांग है। मखाना की खेती मुख्य रूप से तालाबों व जल-जमाव वाले खेतों में कराई जाती है। इसके लिए उपयुक्त तापमान 20 से 35 डिग्री सेल्सियस व चिकनी दोमट मिट्टी आवश्यक है। इसकी बोआई दिसंबर व जनवरी में होती है। इसके बाद अगस्त व सितंबर तक इसके बीज पानी की तलहटी से निकाले जाते हैं।

यह भी पढ़ें- यूपी के सभी सरकारी स्कूलों का होगा सुरक्षा ऑडिट, योगी सरकार ने जारी किया आदेश

मखाना की खेती से लाभ

उप निदेशक उद्यान मेवा राम ने बताया कि कम लागत में अधिक पैदावार होती है। इसमें जल भराव वाली भूमि का सदुपयोग होता है। छह महीने में फसल तैयार हो जाती है। यह परंपरागत धान व गेहूं की फसल से अधिक लाभकारी है।

एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत किसान मखाना की खेती कर सकते हैं। इसके लिए सरकार द्वारा किसानों को अनुदान दिया जाएगा। आवेदक के नाम वांछित क्षेत्रफल का खेत होना चाहिए। अनुदान सहायता के अलावा किसानों को शेष धनराशि स्वयं वहन करनी होगी। नए किसानों का चयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा।


                                                                                      मेवा राम, उप निदेशक उद्यान