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यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में मीरजापुर की कालीन बुनेगी ग्लोबल पहचान, पीतल की चमक भरेगी आर्थिक उड़ान

Published: Tue, 22 Sep 2026 03:37 PM (IST)

ग्रेटर नोएडा में 25-29 सितंबर तक होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में मीरजापुर के कालीन और पीतल उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी।

यूपीआईटीएस में कालीन बुनेगी ग्लोबल पहचान।

यूपीआईटीएस में कालीन बुनेगी ग्लोबल पहचान।

HighLights

  1. यूपीआईटीएस में मीरजापुर के कालीन और पीतल उत्पादों का प्रदर्शन।

  2. स्थानीय कारीगरों को वैश्विक बाजार से जुड़ने का मिलेगा अवसर।

  3. अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने उत्पादों की पहचान बनेगी।

जागरण संवाददाता, मीरजापुर। करघे पर चलती उंगलियां अब दुनिया के बाजार से सीधा संवाद करेंगी। पीतल पर पड़ती हथौड़ी की चोट अब अंतरराष्ट्रीय कारोबार की दस्तक बनेगी। ग्रेटर नोएडा में 25 से 29 सितंबर तक होने वाले उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) में कालीन और पीतल समेत पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक बाजार के सामने अपनी पहचान दिखाने का अवसर मिलेगा।

इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में होने वाला यह आयोजन उत्तर प्रदेश के उत्पादों, उद्यमियों और कारीगरों को देश-विदेश के खरीदारों से जोड़ने का बड़ा मंच बनेगा।

पांच दिन का अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शो स्थानीय हुनर को वैश्विक बाजार की वैल्यू चेन से जोड़ने का अवसर है। कालीन जहां अपनी बारीक बुनावट और कलात्मक डिजाइन से देश-विदेश के खरीदारों को आकर्षित करेगी, वहीं पीतल बर्तन नक्काशी, कलात्मकता और पारंपरिक शिल्प की चमक से कारोबारियों का ध्यान खींचेगा।

अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ घरेलू बीटूबी खरीदार और उपभोक्ता भी ट्रेड शो का हिस्सा होंगे। ऐसे में उद्यमियों को एक ही मंच पर नए बाजार, कारोबारी संपर्क और संभावित आर्डर तलाशने का अवसर मिलेगा।

उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शो के जरिए वैश्विक बाजार के द्वार खुलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था उड़ान भरेंगे ही, पीतल और कालीन मिलकर विदेशी मुद्रा भी लााएंगे।

कालीन जिले की औद्योगिक पहचान है। यूपीआईटीएस में इसका प्रदर्शन जिले के कारीगरों के हुनर को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार की पसंद और मांग से रूबरू कराने का माध्यम बनेगा। पीतल उद्योग भी इस वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाने की क्षमता रखता है।

पीतल के उत्पादों में पारंपरिक नक्काशी और कारीगरी भारतीय शिल्प की विशिष्टता को सामने लााएगी। कालीन और पीतल श्रमप्रधान परंपरागत उद्योग हैं। इन दोनों उत्पादों को ओडीओपी में प्रमुखता मिलने से जिले के पारंपरिक हुनर को एक संगठित पहचान मिली है।

कालीन और पीतल केवल व्यापारिक वस्तुएं नहीं हैं। इनके साथ कारीगरों की पीढ़ियों का अनुभव और भारतीय शिल्प परंपरा भी जुड़ी है। स्थानीय कारीगर का हाथ वैश्विक बाजार से जुड़ेगा तो आर्थिक अवसर के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की संभावना भी मजबूत होगी। -ऋषभ कुमार जैन, कालीन निर्यातक।

यूपीआईटीएस में मीरजापुर के कालीन और पीतल बर्तन उद्यमी अपने उत्पादों के साथ प्रतिभाग कर रहे हैं। कालीन, दरी, कारपेट, हैंडीक्राफ्ट, पीतल और अन्य उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय एवं घरेलू खरीदारों के सामने प्रदर्शित करेंगे। इसमें स्थानीय उद्यमियों को बाजार विस्तार, नए आर्डर और कारोबार बढ़ाने के अवसर मिलेंगे। -वीरेंद्र कुमार सिंह, संयुक्त आयुक्त उद्योग, विंध्याचल मंडल।