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समान नागरिक संहिता लागू होने पर ही भारत सही मायने में बनेगा धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र: कुंवर मानवेंद्र सिंह

By Gurupreet Singh Edited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 26 Oct 2026 01:27 PM (IST)

विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू होने पर ही भारत सही मायने ...और पढ़ें

समान नागरिक संहिता से ही भारत बनेगा सच्चा धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र: कुंवर मानवेंद्र सिंह।

समान नागरिक संहिता से ही भारत बनेगा सच्चा धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र: कुंवर मानवेंद्र सिंह।

HighLights

  1. समान नागरिक संहिता से भारत सही मायने में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनेगा।

  2. महिलाओं के अधिकारों, संवैधानिक समानता और राष्ट्रीय एकता को मिलेगी मजबूती।

  3. समान नागरिक संहिता लागू करने पर आम सहमति बनाना बड़ी चुनौती।

जागरण संवाददाता, चुनार (मीरजापुर)। विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू होने पर ही भारत सही मायने में धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष राष्ट्र कहलाएगा। धर्म, जाति और मजहब से परे विवाह, तलाक, विरासत और भरण-पोषण जैसे मामलों में समान कानून से संवैधानिक समानता और महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिलेगी।

इससे राष्ट्रीय एकता मजबूत होने के साथ न्याय प्रक्रिया भी सरल होगी। वह रविवार को मुंदीपुर स्थित नैनागढ़ पैलेस में संवैधानिक एवं संसदीय अध्ययन संस्थान की उत्तर प्रदेश शाखा की ओर से आयोजित दो दिवसीय विचार गोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विभिन्न पर्सनल लॉ में महिलाओं के अधिकारों में असमानता दूर करना जरूरी है।

हालांकि, देशभर में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए विभिन्न समुदायों के बीच आम सहमति बनाना बड़ी चुनौती है। गोष्ठी में शामिल विद्वानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि उनके बहुमूल्य सुझावों से समान नागरिक संहिता के विभिन्न पहलुओं को समझने और इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

प्रमुख सचिव विधान परिषद डा. राजेश सिंह ने सऊदी अरब में बांग्लादेशी नागरिकों को सजा दिए जाने के प्रकरण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में भारत से अधिक उदार देश दुनिया में कोई नहीं है। समान नागरिक संहिता ऐसे कानूनों में आवश्यक सुधार की पहल है, जिनकी वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में प्रासंगिकता पर विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस विषय पर सभी को खुले मन से चर्चा करनी होगी और देश में इसे लागू करने के लिए आम सहमति बनाने का प्रयास करना होगा। गोष्ठी को पूर्व एमएलसी मणिशंकर पांडेय, राज बहादुर सिंह यादव, डॉ. दिनेश चंद्र त्रिपाठी और केके यादव ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर पूर्व एमएलसी डॉ. वीणा पांडेय, डॉ. आद्या प्रसाद पांडेय, डॉ. मानसी द्विवेदी, मंजू यादव, नूतन सिंह, पुनीत दुबे और धर्मेंद्र मिश्रा सहित अन्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।