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चक्रवाती तूफान 'अर्नब' से यूपी में फसल का हुआ नुकसान तो टोल फ्री 14447 पर दर्ज कराएं शिकायत

By Digital Desk Edited By: Abhishek sharma
Published: Sat, 26 Sep 2026 03:45 PM (IST)

चक्रवाती तूफान के कारण मीरजापुर में किसानों की 50% से अधिक फसल का नुकसान हुआ है। बीमित किसान 72 घंटे ...और पढ़ें

चक्रवाती तूफान 'अर्नब' से फसल नुकसान: मीरजापुर के किसान 14447 पर करें शिकायत।

चक्रवाती तूफान 'अर्नब' से फसल नुकसान: मीरजापुर के किसान 14447 पर करें शिकायत।

HighLights

  1. चक्रवाती तूफान से मीरजापुर में 50% से अधिक फसल क्षति।

  2. बीमित किसान 72 घंटे में 14447 पर शिकायत दर्ज करें।

  3. राजस्व व कृषि विभाग करेंगे मौके पर सर्वे, मिलेगी क्षतिपूर्ति।

जागरण संवाददाता, मीरजापुर। चक्रवाती तुफान के चलते वर्षा आदि से किसानों की 50 प्रतिशत से अधिक फसल का नुकसान हुआ है, तो बीमित किसान 14447 टोल फ्री नंबर पर अविलंब काल करें।

बीमित किसान द्वारा 72 घंटे के अंदर शिकायत दर्ज कराने के बाद बीमा कंपनी के साथ राजस्व व कृषि विभाग के कर्मचारी मौके पर सर्वे करके क्षतिपूर्ति संबंधी कार्रवाई करेंगे। खरीफ वर्ष 2025-26 में 24,243 किसानों को 42.27 करोड़ की क्षतिपूर्ति की धनराशि बीमा कंपनी द्वारा खाते में भेजा गया है।

जनपद में एसबीआइ जनरल इंश्योरेंश कंपनी लिमिटेड को नामित किया गया है। उप कृषि निदेशक विकेश कुमार पटेल ने बताया कि प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण फसलों में विपरीत मौसम के कारण क्षति का सामना करना पड़ता है, जिसकी क्षतिपूर्ति के लिए आवश्यक है कि किसान फसलों का बीमा अवश्य कराया जाता है।

बीमित किसानों को बाढ़, अधिक व कम वर्षा, प्रतिकूल मौसम, फसलों की बोआई बाधित होने, विलंब से होने के कारण उत्पादन में हानि से आय पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इच्छुक केसीसी धारक किसानों का बैंक द्वारा बीमा किया जाता है। खरीफ 2026-27 में धान, मक्का, बाजरा, ज्वार, मूंगफली, तिल, अरहर व मिर्च की फसलों का बीमा कराया गया है।

बीमित धनराशि का दो प्रतिशत धान में 1826, मक्का में 510, बाजरा में 626, ज्वार में 712, तिल में 220, मूंगफली में 1612 व अरहर में 1454 रुपये जमा कराया गया था।

खरीफ अभियान में विपरीत मौसम के चलते फसलों के नुकसान की क्षतिपूूर्ति के लिए किसान बीमा करा सकते हैं। किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत गैर ऋणी किसान बीमा करा सकते हैं। खरीफ की सभी फसलों के लिए दो प्रतिशत व औद्यानिक फसलों के लिए पांच प्रतिशत प्रीमियम है।

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विकेश पटेल, उप निदेशक कृषि।